भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण का संदेश
लखनऊ। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने “ज्ञान भारतम् मिशन” के माध्यम से प्रदेशवासियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की असली पहचान उसका ज्ञान है, जो सदियों से पाण्डुलिपियों में सुरक्षित है।
वेद-उपनिषद में सुरक्षित है भारत का प्राचीन ज्ञान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण और अन्य प्राचीन ग्रंथ केवल धार्मिक धरोहर नहीं हैं, बल्कि विज्ञान, गणित, चिकित्सा, दर्शन और कला के अद्भुत ज्ञान का भंडार भी हैं। भारत की सभ्यता और संस्कृति की जड़ें इन्हीं पाण्डुलिपियों में समाहित हैं।
“ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत चल रहे प्रमुख कार्
मुख्यमंत्री ने बताया कि “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण का व्यापक कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत—
- प्राचीन पाण्डुलिपियों का संरक्षण
- पाण्डुलिपियों का डिजिटलाइजेशन
- डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना
- अब तक 7 लाख से अधिक पाण्डुलिपियों की खोज
जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।

लिए “ज्ञान भारतम मिशन” पर लिखी योगी की पाती
प्रदेशवासियों से अभियान में जुड़ने की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि यदि उनके पास कोई प्राचीन या दुर्लभ पाण्डुलिपि हो, तो उसे साझा कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि यह केवल धरोहर संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान को सुरक्षित रखने का प्रयास है।
विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ा मिशन
मुख्यमंत्री ने कहा कि पाण्डुलिपियों को बचाना केवल अतीत को संरक्षित करना नहीं, बल्कि भारत के भविष्य को मजबूत बनाना है। यह प्रयास भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।






