अंतिम नोटिस के बाद बढ़ा सियासी विवाद, बिहार की राजनीति में फिर गरमाया बंगला मुद्दा
बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी आवास को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने से साफ इनकार कर दिया है, उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार बंगला खाली कराना चाहती है तो फोर्स बुलाकर कार्रवाई करे।
राबड़ी देवी का यह बयान उस समय आया है जब भवन निर्माण विभाग ने उन्हें सरकारी आवास खाली करने का अंतिम नोटिस जारी किया है, इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।
“फोर्स बुलाकर खाली कर दीजिए” — राबड़ी देवी
शनिवार को दिल्ली से पटना पहुंचने के बाद मीडिया ने जब राबड़ी देवी से आवास खाली करने के नोटिस को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने संक्षिप्त लेकिन सख्त प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा, “फोर्स बुलाकर खाली कर दे,” राबड़ी देवी के इस बयान को सरकार के नोटिस के खिलाफ खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे सरकार और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बीच टकराव और बढ़ सकता है।
क्यों जारी हुआ अंतिम नोटिस?
भवन निर्माण विभाग ने शुक्रवार को राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का अंतिम नोटिस भेजा था, विभाग का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2025 के बाद उन्हें नया सरकारी आवास 39 हार्डिंग रोड आवंटित कर दिया गया था, 25 नवंबर 2025 को जारी आदेश के तहत नया आवास आवंटित किए जाने के बावजूद पिछले छह महीनों में पुराने बंगले को खाली नहीं किया गया, इसी कारण विभाग ने अब अंतिम नोटिस जारी करते हुए आवास खाली करने को कहा है।
मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित हो चुका है बंगला
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला अब डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है, 27 मई 2026 को हुए इस आवंटन के बाद भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को आवास खाली करने की प्रक्रिया तेज कर दी है हालांकि, राबड़ी देवी के ताजा बयान से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि वह फिलहाल इस आवास को छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं।
20 वर्षों से रह रहा है लालू परिवार
10 सर्कुलर रोड का यह सरकारी आवास पिछले करीब दो दशकों से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के परिवार का निवास रहा है, नवंबर 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद यह आवास राबड़ी देवी को आवंटित किया गया था, यह बंगला सिर्फ एक सरकारी आवास नहीं, बल्कि लालू परिवार की राजनीतिक यात्रा और कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह भी माना जाता है, यही वजह है कि इस आवास से परिवार का भावनात्मक जुड़ाव भी बताया जाता है।
हाईकोर्ट ने दिया था स्पष्ट निर्देश
वर्ष 2019 में सरकारी आवासों को लेकर पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी, अदालत ने स्पष्ट किया था कि पद छोड़ने के बाद कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री या पूर्व उपमुख्यमंत्री स्थायी रूप से सरकारी बंगले पर अधिकार नहीं रख सकता, क्योंकि ये सार्वजनिक संसाधन हैं और जनता के लिए हैं, इसके बाद 10 सर्कुलर रोड आवास राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आवंटित किया गया था, लेकिन बाद में नया आवास मिलने के बावजूद पुराने बंगले को खाली नहीं किया गया।
क्या और बढ़ेगा सियासी टकराव?
राबड़ी देवी के बयान ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ सरकार नियमों का हवाला देकर आवास खाली कराने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर राबड़ी देवी के रुख से साफ है कि मामला आसानी से सुलझता नजर नहीं आ रहा, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में केवल आवास विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की सियासत में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम और राबड़ी देवी की रणनीति पर टिकी हैं।






