प्रशांत किशोर को कोर्ट का नोटिस, BJP सांसद संजय जायसवाल से जुड़े मामले में 15 जुलाई को होना होगा पेश
जन सुराज के सूत्रधार और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान बीजेपी सांसद डॉ. संजय जायसवाल पर लगाए गए कथित आरोपों के मामले में बेतिया सिविल कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है, अदालत ने प्रशांत किशोर को 15 जुलाई 2026 को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आयोजित एक चुनावी सभा में प्रशांत किशोर ने बीजेपी सांसद डॉ. संजय जायसवाल पर गंभीर आरोप लगाए थे, आरोपों में नगर निगम में डीजल चोरी और अपने पेट्रोल पंप को फायदा पहुंचाने के लिए ओवरब्रिज के एलाइनमेंट में बदलाव कराने जैसी बातें शामिल थीं, इन आरोपों को लेकर सांसद संजय जायसवाल की ओर से न्यायालय में वाद दायर किया गया था, मामले की प्रारंभिक जांच और उपलब्ध तथ्यों के अध्ययन के बाद अदालत ने प्रशांत किशोर को नोटिस जारी किया है।
सांसद के वकील ने दी जानकारी
बीजेपी सांसद संजय जायसवाल के अधिवक्ता चंद्रिका कुशवाहा ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशांत किशोर को नोटिस भेजा है, उन्होंने कहा कि अदालत ने प्रशांत किशोर से उनके आरोपों के समर्थन में जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है वकील के अनुसार, यदि प्रशांत किशोर निर्धारित तिथि पर अदालत में उपस्थित नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
कोर्ट के नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी उपचुनावों से पहले यह मामला जन सुराज और प्रशांत किशोर के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
2025 विधानसभा चुनाव में नहीं खुला था जन सुराज का खाता
गौरतलब है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरकर सरकार बनाने का दावा किया था, हालांकि चुनाव परिणाम पार्टी की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे और जन सुराज का खाता तक नहीं खुल सका, अब बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव को लेकर पार्टी एक बार फिर सक्रिय हो गई है और चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है, ऐसे समय में कोर्ट का यह नोटिस राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।






