
लखनऊ। विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक भावुक संदेश जारी करते हुए बुजुर्गों के सम्मान, सुरक्षा और देखभाल का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धजनों को सबसे अधिक आवश्यकता प्यार, सम्मान और अपनत्व की होती है, लेकिन दुर्भाग्य से आज कई बुजुर्ग अपने ही लोगों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में माता-पिता और गुरु को भगवान के समान स्थान दिया गया है। उन्होंने स्मरण कराया कि प्रभु श्रीराम ने माता-पिता के सम्मान के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था, जबकि भगवान गणेश ने अपने माता-पिता को ही संपूर्ण सृष्टि मानकर उनकी परिक्रमा की थी। ये प्रसंग हमें बुजुर्गों के प्रति सम्मान और समर्पण की प्रेरणा देते हैं।
सीएम योगी ने कहा कि जिन हाथों ने हमें चलना सिखाया, जीवन के हर कठिन मोड़ पर हमारा मार्गदर्शन किया, आज उन्हें हमारे सहारे, सम्मान और स्नेह की आवश्यकता है। वृद्धजनों का सम्मान केवल हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारा नैतिक और सामाजिक दायित्व भी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार वृद्धजनों और निराश्रित महिलाओं के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पात्र वृद्धजनों और निराश्रित महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह पेंशन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना और आवास योजनाओं का लाभ भी उन्हें दिया जा रहा है, ताकि उनका जीवन अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बन सके।
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भी उल्लेख किया। उन्होंने बुजुर्गों से नियमित योग अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इस वर्ष योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” है। योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली को भी बढ़ावा देता है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने परिवार और समाज के बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील रहें, उनका सम्मान करें और उन्हें अकेलापन महसूस न होने दें। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का आशीर्वाद ही परिवार और समाज की सबसे बड़ी पूंजी है।





