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NEET विवाद के बीच छात्रों पर बढ़ता दबाव: दिल्ली, राजस्थान और देहरादून में तीन छात्रों की मौत से चिंता गहरी

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NEET विवाद के बीच छात्रों पर बढ़ता दबाव: दिल्ली, राजस्थान और देहरादून में तीन छात्रों की मौत से चिंता गहरी

NEET परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद और अनिश्चितता के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड से सामने आए हालिया मामलों ने प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और छात्रों की मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में रहने वाली एक छात्रा, जिसने हाल ही में NEET परीक्षा दी थी, अपने घर में मृत पाई गई। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला है कि वह परीक्षा और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर तनाव में थी। मौके से एक नोट भी मिला है, जिसमें उसने अपने माता-पिता से माफी मांगी थी।

पुलिस ने बताया कि घटना के समय छात्रा घर पर अकेली थी। मामले की जांच जारी है और परिवार से भी पूछताछ की जा रही है।

राजस्थान और देहरादून में भी सामने आए मामले

इससे पहले राजस्थान के सीकर में NEET की तैयारी कर रहे एक छात्र की भी मौत हो गई थी। बताया गया कि वह परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ था और अपने परिवार के साथ रह रहा था।

वहीं देहरादून में एक 23 वर्षीय युवती की मौत का मामला भी सामने आया। पुलिस के अनुसार, युवती लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी।

इन घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, अपेक्षाओं और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

NTA ने छात्रों और अभिभावकों से की अपील

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के महानिदेशक ने कहा है कि 21 जून को आयोजित होने वाली पुनर्परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष होगी। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों और कथित पेपर लीक गिरोहों से सावधान रहने की अपील की है।

टेलीग्राम प्रतिबंध पर हाईकोर्ट पहुंची कंपनी

NEET UG पुनर्परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। कंपनी ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की है।

सरकार का कहना है कि परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं टेलीग्राम का तर्क है कि प्रतिबंध के फैसले की न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए परिवार, शिक्षकों और संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है। उनका कहना है कि परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम फैसला नहीं होता और छात्रों को भावनात्मक सहयोग मिलना बेहद जरूरी है।

यदि आप या आपका कोई परिचित भावनात्मक संकट, निराशा या आत्म-हानि के विचारों से जूझ रहा है, तो तुरंत किसी भरोसेमंद परिवारजन, शिक्षक, काउंसलर या स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य सेवा से संपर्क करें। मदद उपलब्ध है।