“रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत लो… आस्था से खिलवाड़ किया तो खैर नहीं!” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुख से जैसे ही ये शब्द निकले, विरोधियों की सांसे थम गई ,,,अयोध्या से लेकर दिल्ली और दिल्ली से लेकर नागपुर तक तक सियासी हलचल तेज हो गई।योगी के बारे में कहा जाता है जब-जब विरोधी उन पर हावी होने की कोशिश किए हैं तब तब वो और भी मजबूत होकर उभरे हैं और एक बार फिर से वही रौद्र रूप योगी आदित्यनाथ का दिखाई दिया है .इसीलिए आयोध्या में इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है .वजह साफ है योगी के समस्त विरोधी इस वक्त उत्तर प्रदेश में मौजूद हैं और योगी को कुर्सी से हटाने के लिए उत्साहित दिख रहे हैं .अखिलेश यादव ,मायावती ,चंद्रशेखर आजाद ,स्वामी प्रसाद मौर्या और अब दिल्ली से चलकर अरविन्द केजरीवाल भी अयोध्या पहुंच गए हैं,,जहां वो कोई बड़ा सियासी फिस्फोट करने वाले है .जिस राम मंदिर दान चोरी मामले में अब तक यह सवाल उठ रहे थे कि कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित है, उसी बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद यह मामला केवल एक जांच का विषय नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित मुद्दा बन गया।
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इस वक्त उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र अयोध्या बना हुआ है। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि, जहां करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है, वहीं अब दानपात्र से कथित चोरी और उससे जुड़े विवादों को लेकर सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा था कि पुलिस की कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि बड़े पदों पर बैठे लोगों से पूछताछ या उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इसी बीच घटनाक्रम ने नया मोड़ तब लिया जब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दोनों ने कहा कि उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर यह फैसला लिया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों के नाम इस मामले में दर्ज एफआईआर में शामिल नहीं थे। इसके बावजूद उनके नामों को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी हो रही थी और विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था। ऐसे माहौल में उनका पद छोड़ना राजनीतिक रूप से एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत लो और उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश मत करो।” उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और उसकी गरिमा पर सवाल खड़े करने से बचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल वही हैं जिन्होंने पहले भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे और अदालत में अलग-अलग पक्ष रखे थे। उन्होंने कहा कि जो लोग आज आस्था की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने पुराने रुख को भी याद करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या पर अनावश्यक आरोप लगाने या भगवान श्रीराम की मर्यादा को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। योगी ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और जांच पूरी निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ेगी। जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है। शुरुआती जांच के बाद एसआईटी ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसी क्रम में अयोध्या पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव समेत आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियां अब भी मामले की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल कर रही हैं।

राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि इस्तीफे किसी सरकारी दबाव या किसी विशेष निर्देश के कारण हुए। आधिकारिक रूप से दोनों ने अपने फैसले को नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच यहीं तक सीमित रहेगी या आगे और नए तथ्य सामने आएंगे। विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि जांच कानून के अनुसार आगे बढ़ रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि राम मंदिर दान चोरी प्रकरण ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक इस मामले पर लगातार नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच, पुलिस की कार्रवाई और आधिकारिक फैसले ही तय करेंगे कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।एक बात जरूर साफ है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश स्पष्ट था—आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या कानून के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और जांच अपने निष्कर्ष तक पहुंचेगी।






