वाराणसी में भगवान जगन्नाथ की 224 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रथ यात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस बार यात्रा को और अधिक भव्य बनाने के लिए ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से 500 विशेष पताकाएं मंगाई जा रही हैं। इन पताकाओं को पुरी मंदिर के पुजारियों ने खास तौर पर काशी की रथ यात्रा के लिए तैयार कराया है। डोली यात्रा और रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु इन्हें हाथों में लेकर शामिल होंगे, जिससे पूरे आयोजन की भव्यता और बढ़ जाएगी।

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15 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की डोली यात्रा
श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि 15 जुलाई की शाम अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से पारंपरिक डोली यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा में दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर की 40 सदस्यीय संकीर्तन मंडली भक्ति गीतों और हरिनाम संकीर्तन से माहौल को भक्तिमय बनाएगी। इस बार 108 डमरू दलों की एक साथ गूंज डोली यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण होगी। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालु भगवान का स्वागत पुष्पवर्षा के साथ करेंगे।
काढ़े के प्रसाद के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
रथ यात्रा से पहले अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक काढ़े का प्रसाद लेने के लिए लगातार बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर के पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता, काली मिर्च और कई औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़े का पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को भोग लगाया जाता है। इसके बाद इसे श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। मान्यता है कि इस काढ़े के सेवन के बाद भगवान स्वस्थ होते हैं और फिर भक्तों को दर्शन देते हैं। एक दिन में 500 से अधिक श्रद्धालु इस प्रसाद को ग्रहण कर चुके हैं।
224 वर्षों से चली आ रही है काशी की परंपरा
मंदिर ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी के अनुसार, काशी की जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास लगभग 224 वर्ष पुराना है। पुरी के प्रमुख संत स्वामी तेजू निधि ब्रह्मचारी ने वर्ष 1790 में अस्सी घाट क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ के विग्रह की स्थापना कराई थी और उसी समय मंदिर का निर्माण भी पूरा हुआ। इसके बाद वर्ष 1802 से शाहपुरी राजवंश के संरक्षण में यह रथ यात्रा निरंतर आयोजित की जा रही है। हर वर्ष इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने इस बार भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक तैयारियां की हैं, ताकि यह धार्मिक आयोजन पूरी भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हो सके।






