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कानूनी प्रक्रिया में AI के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी

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नई दिल्ली: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक और कानूनी प्रक्रियाओं में इसके उपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि एआई एक उपयोगी तकनीक जरूर है, लेकिन इसका अनियंत्रित और बिना सत्यापन के इस्तेमाल अदृश्य और खतरनाक साबित हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी मामलों में किसी भी एआई टूल से प्राप्त जानकारी को अंतिम या प्रमाणिक मानना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि एआई कई बार तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी काल्पनिक फैसलों (Hallucinations) या भ्रामक कानूनी संदर्भ प्रस्तुत कर सकता है जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने का खतरा रहता है।अदालत ने कहा कि वकीलों और न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे एआई से प्राप्त किसी भी जानकारी का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करें। केवल एआई पर निर्भर होकर दलीलें या कानूनी दस्तावेज तैयार करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि शोध दस्तावेजों के विश्लेषण और प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार करने जैसे कार्यों में एआई सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय, कानूनी व्याख्या और न्यायिक विवेक का स्थान कोई तकनीक नहीं ले सकती।विशेषज्ञों का भी मानना है कि जनरेटिव एआई टूल्स कई बार आत्मविश्वास के साथ गलत जानकारी प्रस्तुत कर देते हैं। ऐसे में अदालतों, वकीलों और कानूनी संस्थानों को इनके इस्तेमाल में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दुनिया भर में न्यायिक व्यवस्था, सरकारी संस्थानों और निजी संगठनों में एआई आधारित टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि तकनीक का स्वागत किया जा सकता है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

EDITOR SHIVANSHU PATWA

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