पूर्व सपा विधायक के ठिकानों पर ED की छापेमारी, अखिलेश यादव का पलटवार- ‘छापा मारना चाहिए…’
समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत छापेमारी की यह कार्रवाई झांसी और लखनऊ समेत कई स्थानों पर एक साथ की गई, ED की इस कार्रवाई के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना साधा।
ED की कार्रवाई पर अखिलेश यादव का बयान
छापेमारी के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “छापा मारना चाहिए… कर्नाटक और महाराष्ट्र में मार रहे हैं, यूपी में, जहां CC का माल है वहां नहीं जाते हैं, बस दिखावटी औपचारिकता निभाते हैं,” अखिलेश यादव के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है।
आय से अधिक संपत्ति के मामले से जुड़ी है जांच
ED की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है, एफआईआर में पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए हैं, इसी एफआईआर के आधार पर ED ने प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलू से जांच शुरू की है।
कंपनियों के नेटवर्क के जरिए धन के लेनदेन का आरोप
प्रारंभिक जांच में ED का दावा है कि कथित अपराध से अर्जित धन को रियल एस्टेट, निर्माण (कंस्ट्रक्शन) और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी कई कंपनियों तथा लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के माध्यम से स्थानांतरित किया गया, जांच एजेंसी को संदेह है कि इन संस्थाओं का उपयोग कथित रूप से अवैध धन को वैध दिखाने के लिए किया गया। ED के अनुसार, इस मामले में धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत सूचीबद्ध अपराधों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।
23 से अधिक एफआईआर का भी जिक्र
ED के मुताबिक, जांच के दौरान इस पूरे मामले से जुड़े 23 से अधिक एफआईआर सामने आई हैं। एजेंसी इन्हीं मामलों के आधार पर वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जांच कर रही है, छापेमारी के दौरान ED ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और चल-अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं, एजेंसी इन रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल कहां और किस प्रकार किया गया।
सूत्रों के अनुसार, जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच जारी है, ED का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
जांच जारी, आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत का
फिलहाल ED धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत मामले की जांच कर रही है। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।






