
लखनऊ। गाजीपुर के करमपुर गांव से निकलकर भारतीय हॉकी में अपनी पहचान बनाने वाले राजकुमार पाल को प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड देने की घोषणा की गई है। 28 वर्षीय राजकुमार पाल पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे हैं। इस समय वह बेल्जियम में चल रहे हॉकी विश्वकप के लिए भारतीय टीम के स्टैंडबाई खिलाड़ियों में शामिल हैं।राजकुमार पाल का सफर संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद उन्होंने हॉकी को अपना लक्ष्य बनाया और इसी खेल के दम पर भारतीय टीम तक पहुंचे।
करमपुर में शायद ही कोई घर हॉकी से अछूता हो
राजकुमार पाल बताते हैं कि गाजीपुर के करमपुर गांव में हॉकी का जुनून कुछ ऐसा है कि शायद ही कोई घर इस खेल से अछूता हो। गांव की हॉकी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में दिवंगत तेज बहादुर सिंह की अहम भूमिका रही।राजकुमार ने वर्ष 2008 में अपने बड़े भाइयों के साथ शौकिया तौर पर हॉकी खेलना शुरू किया था। उस समय परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें और आगे चलकर कोई अच्छी नौकरी हासिल कर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करें।लेकिन हॉकी के प्रति उनका लगाव लगातार बढ़ता गया। आखिरकार उन्होंने खेल को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया।
परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं थी अच्छी
राजकुमार पाल के शुरुआती दिनों में परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। परिजन चाहते थे कि वह पढ़ाई पूरी करें और घर की आर्थिक परेशानियों को दूर करने में योगदान दें।हालांकि, राजकुमार का सपना भारतीय हॉकी खिलाड़ी बनना था। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद हॉकी का अभ्यास जारी रखा और अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।
2012 में लखनऊ SAI सेंटर में हुआ चयन
राजकुमार पाल के करियर में बड़ा मोड़ वर्ष 2012 में आया, जब उनके प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन लखनऊ SAI सेंटर के लिए हुआ।लखनऊ में उन्हें उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं मिलीं। इस प्रशिक्षण ने उनके खेल को नई दिशा दी और धीरे-धीरे उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह मजबूत की।इसके बाद उनके प्रदर्शन में लगातार निखार आया और उन्हें भारतीय हॉकी टीम में जगह बनाने का मौका मिला।
पेरिस ओलंपिक कांस्य पदक को मानते हैं जीवन का सर्वश्रेष्ठ क्षण
राजकुमार पाल के लिए पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतना उनके करियर का सबसे यादगार पल रहा। भारतीय हॉकी टीम ने लगातार दूसरे ओलंपिक में पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।राजकुमार का कहना है कि भारतीय हॉकी को उसके पुराने गौरव की ओर लौटते देखना उनके लिए बेहद खास है। लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतना भारतीय हॉकी के लिए बड़ी उपलब्धि है।अब उनका लक्ष्य पदक का रंग बदलना और भारतीय टीम के साथ देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
विश्वकप में दमदार वापसी का भरोसा
बेल्जियम में चल रहे हॉकी विश्वकप के लिए राजकुमार पाल भारतीय टीम के स्टैंडबाई खिलाड़ियों में शामिल हैं। विश्वकप में ब्रिटेन के खिलाफ मुकाबले के प्रदर्शन को उन्होंने निराशाजनक बताया, लेकिन टीम की वापसी का भरोसा जताया।उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट में आगे भारतीय टीम बेहतर प्रदर्शन करते हुए मजबूत वापसी कर सकती है।
एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक पर नजर
राजकुमार पाल की नजर अब आने वाली बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर भी है। उनका लक्ष्य भारतीय टीम के साथ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है।इसके लिए वह लगातार कड़ी मेहनत कर रहे हैं और अपने खेल को और बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।
करमपुर की हॉकी नर्सरी ने बदली यूपी की तस्वीर
राजकुमार पाल की सफलता सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह करमपुर की हॉकी नर्सरी की ताकत को भी दिखाती है। छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले खिलाड़ियों ने उत्तर प्रदेश में हॉकी को नई पहचान दिलाई है।राजकुमार की कहानी यह भी बताती है कि यदि प्रतिभा को सही प्रशिक्षण और अवसर मिले तो छोटे शहर और गांव भी देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दे सकते हैं।
राजकुमार पाल की उपलब्धियां एक नजर में
- गाजीपुर के करमपुर गांव के रहने वाले हैं राजकुमार पाल।
- वर्ष 2008 में हॉकी खेलना शुरू किया।
- वर्ष 2012 में लखनऊ SAI सेंटर में चयन हुआ।
- भारतीय हॉकी टीम में जगह बनाई।
- पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीता।
- अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयनित हुए।
- हॉकी विश्वकप के लिए भारतीय टीम के स्टैंडबाई खिलाड़ियों में शामिल।
- भारतीय हॉकी के साथ पदक का रंग बदलने और स्वर्ण जीतने का लक्ष्य।