लखनऊ, 19 अगस्त। उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों के पारंपरिक हुनर और व्यवसाय को नई पहचान दिलाने की दिशा में योगी सरकार पहल कर रही है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की मासिक बैठक में अनाज भूनने के पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के कारीगरों के लिए ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ के गठन के प्रस्ताव पर विस्तार से मंथन किया गया।
बोर्ड के जरिए पारंपरिक कारीगरों को उनके हुनर का संरक्षण देने के साथ आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, आसान ऋण, सब्सिडी और बाजार उपलब्ध कराने की योजना पर विचार किया गया। इससे पारंपरिक व्यवसाय को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ने के साथ आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की मुहिम को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। लखनऊ स्थित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यालय में हुई बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने की। बैठक में पिछड़े वर्गों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा और पात्र लाभार्थियों तक उनका लाभ पहुंचाने पर भी चर्चा हुई।
आयोग में प्राप्त एसके सिंघानिया के पत्र पर विचार करते हुए भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के लोगों के लिए श्री अन्न कला बोर्ड के गठन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। प्रस्ताव के तहत पारंपरिक अनाज भूनने के कारोबार को खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम किया जा सकता है। इसके साथ ही कारीगरों को आसान ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराने तथा उनके उत्पादों को बेहतर बाजार देने की व्यवस्था पर भी विचार किया गया। बोर्ड की परिकल्पना को सरकार की ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ODOP) जैसी योजनाओं से जोड़कर पारंपरिक स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की संभावना भी देखी जा रही है।
बैठक में विश्वकर्मा एकीकरण अभियान संस्था की ओर से विश्वकर्मा समाज की सत्ता में भागीदारी से संबंधित पत्र पर भी विचार हुआ। विश्वकर्मा कल्याण आयोग और विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के गठन को लेकर मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में लागू व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाने का निर्णय लिया गया। आयोग के सचिव को संबंधित राज्यों से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर उसे आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़ी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल, उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली सहित आयोग के सदस्य मौजूद रहे।