लखनऊ, 20 अगस्त। लखनऊ के सरोजनीनगर और मोहनलालगंज क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की दिशा में योगी सरकार ने कवायद तेज कर दी है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत नदी में गिरने वाले नालों की पहचान, उनकी टैपिंग और सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाकर शोधित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसी क्रम में सई नदी में जाने वाले करीब 59.88 एमएलडी सीवेज वाले अनटैप्ड नाले को रोकने के लिए 100 एमएलडी क्षमता वाले बिजनौर एसटीपी का निर्माण शुरू हो चुका है।
बिजनौर एसटीपी का कार्यादेश 2 जून 2025 को जारी हुआ था और 23 जून 2026 से निर्माण कार्य शुरू किया गया। परियोजना पूरी होने के बाद अनटैप्ड नाले से सीधे सई नदी में पहुंचने वाले सीवेज को उपचारित किया जा सकेगा। इससे नदी में अशोधित सीवेज के प्रवाह को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।
लखनऊ में निर्माणाधीन, स्वीकृत और प्रस्तावित एसटीपी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में कुल 1263 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता विकसित हो जाएगी। इससे वर्ष 2044 तक शहर में उत्पन्न होने वाले सीवेज के शोधन की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था तैयार होने की उम्मीद है। सरकार का फोकस मौजूदा जरूरत के साथ भविष्य में बढ़ने वाली आबादी और सीवेज की मात्रा को ध्यान में रखते हुए स्थायी सीवेज प्रबंधन व्यवस्था तैयार करने पर है।
सीवेज शोधन के साथ शोधित पानी के पुन: उपयोग की योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। 39 एमएलडी क्षमता वाले दौलतगंज एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी के पुन: उपयोग के लिए 16 एमएलडी क्षमता के टीटीपी का निर्माण किया जा रहा है। इस पानी को पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क में औद्योगिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने की योजना है। इससे उद्योगों की पानी की जरूरत पूरी करने के साथ स्वच्छ जल स्रोतों पर दबाव कम किया जा सकेगा।
इसी तरह 3.5 एमएलडी एसटीपी से शोधित पानी को राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क में बागवानी और सफाई जैसे कार्यों में इस्तेमाल करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इससे इन कार्यों के लिए स्वच्छ पानी की खपत कम करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
बिजनौर में निर्माणाधीन 100 एमएलडी एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी के पुन: उपयोग का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इसके तहत चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में विभिन्न जरूरतों के लिए इस पानी के इस्तेमाल की योजना पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर एयरपोर्ट में साफ पानी की खपत कम करने के साथ शोधित पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह के मुताबिक, लखनऊ में सीवेज प्रबंधन की पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य अशोधित सीवेज को सई नदी में पहुंचने से रोकना है। इसके लिए नालों की टैपिंग, पर्याप्त एसटीपी क्षमता विकसित करने और शोधित पानी के पुन: उपयोग पर एक साथ काम किया जा रहा है।
कुल 1263 एमएलडी की प्रस्तावित सीवेज शोधन क्षमता के साथ लखनऊ में सीवेज प्रबंधन को दीर्घकालिक आधार देने की तैयारी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से सई नदी के प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के साथ जल संरक्षण और शहर की पर्यावरणीय व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।