लखनऊ/गोरखपुर, 20 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पारंपरिक शिल्प, स्थानीय उत्पादों और युवा उद्यमिता को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना ने गोरखपुर के पारंपरिक टेराकोटा शिल्प को नई पहचान देने के साथ ही कई कारीगरों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ाए हैं। गोरखपुर के औरंगाबाद, लंगड़ी गुलरिहा गांव निवासी टेराकोटा शिल्पकार राजन प्रजापति की सफलता इसकी मिसाल है।
पुश्तैनी टेराकोटा कला को आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों से जोड़कर राजन प्रजापति आज सफल उद्यमी बन चुके हैं। कभी सीमित संसाधनों और आय के बीच काम करने वाले राजन अब करीब डेढ़ करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार कर रहे हैं। उनकी इकाई से 25 से अधिक कारीगरों को नियमित रोजगार मिल रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है।
राजन के मुताबिक, ओडीओपी योजना उनके कारोबार के विस्तार में महत्वपूर्ण साबित हुई। योजना के माध्यम से मिले प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, आधुनिक उपकरण और बाजार से जुड़ने के अवसरों ने उनके काम को नई दिशा दी। इलेक्ट्रिक चाक और आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता बढ़ी और उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार आया। इसके बाद गोरखपुर का टेराकोटा देश के कई बड़े शहरों तक पहुंचने लगा।
गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों को जीआई टैग मिलने से इस पारंपरिक कला को व्यापक पहचान मिली है। स्थानीय शिल्प की विशिष्टता और गुणवत्ता के चलते बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ी है। त्योहारों के मौसम में राजन की इकाई से 18 से 24 ट्रक तक टेराकोटा उत्पाद विभिन्न राज्यों के लिए भेजे जाते हैं। राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित राजन अब अपनी कार्यशाला के माध्यम से युवाओं को भी टेराकोटा शिल्प की बारीकियां सिखा रहे हैं।
राजन की कार्यशाला अब केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि प्रशिक्षण का माध्यम भी बन गई है। यहां युवाओं को पारंपरिक कला के साथ आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे एक ओर जहां गोरखपुर की सदियों पुरानी टेराकोटा कला को संरक्षण मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का अवसर भी मिल रहा है।
प्रदेश सरकार की ओडीओपी योजना का उद्देश्य जिलों के विशिष्ट और पारंपरिक उत्पादों को प्रोत्साहित कर कारीगरों और उद्यमियों की आय बढ़ाना तथा उन्हें देश-विदेश के बाजार से जोड़ना है। प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय सहयोग, आधुनिक उपकरण और विपणन सुविधाओं के जरिए स्थानीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है।
राजन प्रजापति की सफलता इस बात का उदाहरण है कि पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक, सरकारी सहयोग और बाजार की जरूरतों से जोड़कर बड़े कारोबार में बदला जा सकता है। गोरखपुर का टेराकोटा आज स्थानीय पहचान से आगे बढ़कर राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रहा है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को मजबूत करने के साथ ही युवाओं और कारीगरों को अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दे रही है।