लखनऊ: उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब एक महीने में चीनी के दाम में तेज उछाल देखने को मिला है। यूपी के कई शहरों में खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है। 20 अगस्त को उपलब्ध बाजार आंकड़ों में कुछ जगहों पर भाव करीब 67 से 68 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किया गया। बढ़ती कीमतों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बाजार में चीनी की कमी है और आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं?
इन सवालों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चीनी की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में चीनी की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त मात्रा में स्टॉक मौजूद है। सरकार ने अधिकारियों को बाजार में जमाखोरी और कालाबाजारी पर नजर रखने के निर्देश भी दिए हैं।
यूपी में कितना चीनी स्टॉक?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुताबिक प्रदेश की चीनी मिलों में कुल 179.38 लाख क्विंटल चीनी उपलब्ध है। इसमें सहकारी चीनी मिलों के पास करीब 23.60 लाख क्विंटल, निगम की चीनी मिलों में 5.28 लाख क्विंटल और निजी चीनी मिलों में लगभग 150.50 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक मौजूद है।सरकार का कहना है कि उपलब्ध स्टॉक को देखते हुए प्रदेश में चीनी की आपूर्ति को लेकर फिलहाल किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।

आखिर क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम?
चीनी की कीमत सिर्फ बाजार में मांग के आधार पर तय नहीं होती। इसके पीछे गन्ने की उपलब्धता, चीनी मिलों का उत्पादन, पुराना स्टॉक, मांग और आपूर्ति का संतुलन, घरेलू बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कीमतों जैसे कई कारक काम करते हैं।यूपी के कानपुर, नोएडा, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ, मथुरा और आगरा समेत कई शहरों में खुदरा बाजार में कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ऐसे में सरकार अब यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि उपलब्ध स्टॉक का कृत्रिम संकट पैदा कर कीमतों को न बढ़ाया जाए।
जमाखोरी पर होगी सख्त कार्रवाई
सीएम योगी ने अधिकारियों को चीनी की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सरकार के मुताबिक किसी कारोबारी को 30 दिन से अधिक समय तक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। वहीं, एक समय में किसी डीलर के पास 400 टन से ज्यादा स्टॉक मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसका मकसद बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होने से रोकना और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराना है।

48 लाख किसानों को हुआ गन्ना भुगतान
मुख्यमंत्री ने गन्ना किसानों के भुगतान का भी जिक्र किया। उनके अनुसार करीब 48 लाख किसानों को 3,217 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। सरकार का दावा है कि किसानों को समय पर भुगतान और आगामी पेराई सत्र के शुरू होने से चीनी उत्पादन की स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।बताया गया है कि 15 अक्टूबर से नया गन्ना पेराई सत्र शुरू होने की तैयारी है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में गन्ने की उपलब्धता और नए उत्पादन से बाजार में चीनी की आपूर्ति बनी रहेगी।फिलहाल बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का संदेश साफ है—यूपी में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और जमाखोरी या कालाबाजारी के जरिए कृत्रिम संकट पैदा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि बाजार में बढ़े हुए दाम कब तक सामान्य होते हैं और उपभोक्ताओं को राहत कब मिलती है।