लखनऊ, 22 अगस्त। एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की। बैठक में पराली प्रबंधन, प्रदूषणकारी उद्योगों पर कार्रवाई, सड़क से उड़ने वाली धूल की रोकथाम, ईवी परिवहन और विभागीय समन्वय सहित कई अहम मुद्दों पर दिशा-निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वायु प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच की जाए। प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी उपकरण स्थापित कराने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में धान की पराली के प्रभावी प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को पराली प्रबंधन में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए बेलर और अन्य कृषि मशीनरी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मशीनरी की कमी को दूर करने के लिए लंबित टेंडर प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। खेत स्तर पर निगरानी बढ़ाने और किसानों को पराली न जलाने के लिए लगातार जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।
सड़क से उड़ने वाली धूल को प्रदूषण का प्रमुख कारण मानते हुए रोड रिडेवलपमेंट और रोड डस्ट की रोकथाम से जुड़े कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए। गड्ढों की मरम्मत और क्षतिग्रस्त फुटपाथों के पुनर्स्थापन का काम प्राथमिकता के आधार पर कराने को कहा गया। लोक निर्माण विभाग, नगर निकायों, हाउसिंग और अर्बन विभागों की क्षतिग्रस्त सड़कों की जानकारी संबंधित विभागों को तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि मरम्मत कार्य में देरी न हो।
सरकार ने एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने पर भी जोर दिया है। मुख्य सचिव ने ईवी सिटी बसों की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक चार्जिंग पॉइंट्स की संभावित लोकेशन जल्द चिन्हित कर नेडा को उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके।
वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों में बेहतर समन्वय के लिए सभी संबंधित विभागों को नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि पवन पोर्टल पर सही, पूर्ण और अद्यतन डेटा अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए, जिससे प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई और उसकी प्रगति की वास्तविक स्थिति की निगरानी की जा सके।
वाहनों के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। एंड-टू-एंड वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिन जनपदों में कार्रवाई संतोषजनक नहीं है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और कार्यों की नियमित समीक्षा के लिए मासिक लक्ष्य निर्धारित करने को कहा गया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वायु प्रदूषण की रोकथाम से जुड़े सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। साथ ही जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को प्रदूषण रोकने के उपायों के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में प्रभावी सुधार सुनिश्चित किया जा सके।