हरिद्वार की श्रीजी वाटिका में आयोजित ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ कार्यक्रम में योग गुरु स्वामी रामदेव ने एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से देश के विकास कार्य प्रभावित होते हैं और चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों का भी काफी समय चला जाता है। रामदेव ने कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन लागू होने से शिक्षक बच्चों को ज्यादा समय दे सकेंगे, जिससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश का मतदाता समझदार है और वह राज्य व केंद्र के लिए अपनी पसंद का फैसला खुद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है, लेकिन उनकी इच्छा है कि भारत 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए। रामदेव ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में सड़क और संसद के हंगामे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को हंगामे के जरिए बंधक बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे करने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि अन्याय के खिलाफ 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं।
कंगना रनौत के बयान पर टिप्पणी से इनकार
कंगना रनौत के बयान को लेकर सवाल पूछे जाने पर स्वामी रामदेव ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह ऐसी किसी बात पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, जिससे विवाद और बढ़े। उनका उद्देश्य विवाद बढ़ाना नहीं, बल्कि सकारात्मक मुद्दों पर बात करना है।
वंदे मातरम पर भी रखी राय
वंदे मातरम को लेकर रामदेव ने कहा कि इसके भाव और सांस्कृतिक संदर्भ को समझने की जरूरत है। उन्होंने भारत माता को आस्था, संस्कृति, कर्तव्य और जीवन मूल्यों का प्रतीक बताते हुए कहा कि वंदे मातरम भारत माता के प्रति सम्मान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति है। उन्होंने समाज में जाति और वर्ग के नाम पर भेदभाव तथा एक-दूसरे का अपमान करने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। रामदेव ने कहा कि एससी, एसटी, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, ब्राह्मण या संन्यासी किसी का भी अपमान नहीं होना चाहिए।