लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अनुदानित मदरसों से जुड़े कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच अब तेज होती दिखाई दे रही है। प्रदेश के 558 अनुदानित मदरसों में नियुक्तियों, सरकारी धन के इस्तेमाल और अभिलेखों से जुड़ी शिकायतों के बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने प्रारंभिक जांच शुरू की है। शिकायत में करीब 1,100 करोड़ रुपये के सालाना सरकारी बजट से जुड़े खर्च और कई अन्य मामलों की जांच की मांग की गई है।
बताया गया है कि मामले में भ्रष्टाचार निवारण संगठन के महानिरीक्षक की ओर से 17 अगस्त को जांच के आदेश दिए गए, जिसके बाद प्रारंभिक पड़ताल शुरू हुई। हालांकि, अभी जांच शुरुआती चरण में है और लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।
35 बिंदुओं पर जांच की मांग
मामले में दी गई 333 पन्नों की शिकायत में करीब 35 अलग-अलग बिंदुओं पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इनमें नियमों के विपरीत नियुक्तियां, अभिलेखों में कथित हेरफेर, प्रबंध समितियों की वैधता और वेतन भुगतान से जुड़े सवाल शामिल हैं।शिकायत में मदरसों में कार्यरत शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और विद्यार्थियों की संख्या की भी जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिकता और प्रबंध समितियों के रिकॉर्ड की जांच का मुद्दा भी उठाया गया है।
नियुक्तियों और कोविड काल के रिकॉर्ड पर भी नजर
शिकायत में कथित तौर पर हुई ऐसी नियुक्तियों की जांच की मांग की गई है, जिनमें नियमों का पालन नहीं किए जाने का आरोप है। कोविड काल के दौरान हुई नियुक्तियां भी जांच के दायरे में आने की बात कही गई है।इसके साथ ही कुछ मामलों में कथित फर्जी हस्ताक्षर और सोसायटी के रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता की ओर से ऐसे दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ने पर फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की गई है, ताकि रिकॉर्ड की वास्तविकता सामने आ सके।
सरकारी धन और वेतन भुगतान पर सवाल
शिकायत में सरकारी अनुदान से होने वाले वेतन भुगतान और अन्य खर्चों की भी जांच की मांग की गई है। आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में सरकारी धन के इस्तेमाल में अनियमितता हो सकती है।इसके अलावा मदरसों को सरकारी अनुदान के अलावा मिलने वाले चंदे, जकात, सदका और फितरा जैसी रकम के इस्तेमाल में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग भी उठाई गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
क्या किसी संगठित नेटवर्क की भी होगी जांच?
पूरे मामले में एक अहम सवाल यह भी उठाया गया है कि क्या अलग-अलग जिलों में सामने आई कथित अनियमितताओं के पीछे कोई संगठित व्यवस्था या नेटवर्क काम कर रहा था। शिकायतकर्ता ने जांच एजेंसी से इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाने की मांग की है।अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति पता लगाने की होगी। नियुक्तियों की प्रक्रिया, शिक्षकों की योग्यता, छात्र संख्या, प्रबंध समितियों की वैधता और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच अहम मानी जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी आरोप शिकायत के आधार पर लगाए गए हैं और जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी मानना अभी जल्दबाजी होगी।जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और सरकारी धन के इस्तेमाल में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है या नहीं।558 अनुदानित मदरसों से जुड़ी इस जांच पर अब प्रदेश की नजर है। आने वाले दिनों में दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि मामला प्रशासनिक अनियमितताओं तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा वित्तीय खेल भी सामने आता है।
