लखनऊ, 24 अगस्त। प्रदेश में नकली, अधोमानक, मिलावटी और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर योगी सरकार ने शिकंजा और कस दिया है। मरीजों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं पहुंचाने के लिए अब औषधि लाइसेंस जारी करने से लेकर दवाओं के भंडारण, खरीद-बिक्री, बिलिंग और पूरी सप्लाई चेन की सघन निगरानी की जाएगी। डमी व्यक्तियों के नाम पर लाइसेंस, फर्जी बिलिंग, स्टॉक में हेराफेरी और काउंटरफीट दवाओं के नेटवर्क का पता लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने विस्तृत एसओपी जारी की है।
एफएसडीए की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत औषधि निरीक्षकों और अनुज्ञापन प्राधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। जांच अब केवल मेडिकल स्टोर या थोक विक्रेता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संदिग्ध दवा के स्रोत से लेकर निर्माता और सप्लायर तक पूरी सप्लाई चेन खंगाली जाएगी। गंभीर मामलों में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के साथ बीएनएस और एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं में भी कार्रवाई की जाएगी।
नए थोक औषधि लाइसेंस के लिए आवेदक और फर्म की पृष्ठभूमि का गहन सत्यापन किया जाएगा। पहले अवैध दवा कारोबार में शामिल रहे लोगों द्वारा रिश्तेदारों या डमी व्यक्तियों के नाम पर नया लाइसेंस हासिल करने की कोशिश पर रोक लगाई जाएगी। गंभीर उल्लंघन करने वालों को लाइसेंस लेने से डिबार किया जाएगा और उनके कारोबारी साझेदारों तथा सहयोगियों की भूमिका भी जांची जाएगी। लाइसेंस जारी करने से पहले प्रतिष्ठान का भौतिक सत्यापन भी होगा।
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि लाइसेंसी दुकान या प्रतिष्ठान का संचालन वास्तव में लाइसेंसधारी ही कर रहा है या उसके नाम पर कोई दूसरा व्यक्ति कारोबार चला रहा है। बैंक खाता, जीएसटी पंजीकरण और अन्य जरूरी दस्तावेज भी लाइसेंसधारी के नाम पर होना जरूरी होगा। किसी महिला या अन्य व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस लेकर कारोबार किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा संचालित किए जाने की पुष्टि होने पर लाइसेंस के निलंबन या निरस्तीकरण के साथ अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी। लाइसेंसी दुकान से अलग बेसमेंट, आवासीय मकान या किराए के कमरे में बिना लाइसेंस दवाओं का स्टॉक मिलने पर भी सख्त कार्रवाई होगी।
डायबिटीज, हाइपरटेंशन, एंटीबायोटिक्स, कैंसर की दवाओं और पेन किलर जैसी फास्ट मूविंग और हाई वैल्यू दवाओं के वास्तविक स्टॉक का रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। स्टॉक में अंतर मिलने पर दवाओं की खरीद, बिक्री और उनके स्रोत की जांच की जाएगी। एक ही फर्म से माल खरीदकर उसी को वापस बेचने, असामान्य रूप से कम कीमत पर दवाएं बेचने, सीमित विक्रेताओं के बीच क्रॉस बिलिंग या कागजों पर स्टॉक एडजस्ट करने जैसी गतिविधियां मिलने पर जांच निर्माता और सप्लायर स्तर तक पहुंचेगी।
नई व्यवस्था के तहत दवा कारोबार में इस्तेमाल होने वाले बिलिंग सॉफ्टवेयर की भी जांच होगी। माइनस स्टॉक, बैक डेटेड बिलिंग, डेटा डिलीट करना, दोहरे खाते रखना या वास्तविक स्टॉक छिपाने जैसी गतिविधियों को गंभीर अनियमितता माना जाएगा। छापेमारी के दौरान सीसीटीवी डीवीआर, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट रिसिप्ट, दवाओं के बैच नंबर और पैकिंग से जुड़े रिकॉर्ड सहित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जाएगा। बैंक ट्रांजेक्शन की पड़ताल के जरिए कागजों पर दर्ज कारोबार और वास्तविक भुगतान के बीच संबंध की भी जांच होगी।
संदिग्ध दवाओं के लेबल, स्पेलिंग, फॉर्मूला, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी तिथि, निर्माता या मार्केटिंग कंपनी का पता, वायल और ब्लिस्टर पैकिंग तथा सिक्योरिटी फीचर की बारीकी से जांच की जाएगी। मूल दवा के नमूने से अंतर मिलने पर उसकी बिक्री तत्काल रोककर नमूना राजकीय विश्लेषक को भेजा जाएगा। वैध स्रोत नहीं मिलने या संबंधित निर्माता द्वारा दवा के निर्माण से इनकार किए जाने की स्थिति में उसे काउंटरफीट या स्प्यूरियस मानकर कार्रवाई की जाएगी। राजकीय विश्लेषक की रिपोर्ट में पुष्टि होने पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के साथ बीएनएस की सुसंगत धाराओं में संयुक्त एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
सरकारी सप्लाई, ईएसआई, डिफेंस सप्लाई, फिजिशियन सैंपल या एक्सपायर्ड दवाओं को रिलेबल कर बाजार में बेचने के मामलों में संबंधित स्टॉक को अभिरक्षा में लेकर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इंसुलिन और वैक्सीन जैसे कोल्ड चेन उत्पाद निर्धारित 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बजाय सामान्य तापमान पर रखे मिलने पर भी नियमानुसार कार्रवाई होगी। अंतर-जनपदीय और अंतर-राज्यीय खरीद बिलों में गड़बड़ी मिलने पर दवा के वास्तविक स्रोत की पड़ताल की जाएगी। कई फर्मों के बीच कॉकस या बिलिंग लूप सामने आने पर नेटवर्क से जुड़ी सभी फर्मों की एक साथ जांच होगी।
काउंटरफीट या स्प्यूरियस दवा की पुष्टि अथवा गंभीर अनियमितता मिलने पर संबंधित दवा की बिक्री और वितरण तत्काल रोक दिया जाएगा। स्टॉक सीज करने के साथ लाइसेंस के निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई होगी। लाइसेंस निरस्त होने के बाद संबंधित फर्म से दवाओं की खरीद-बिक्री पूरी तरह बंद कराई जाएगी। वैध खरीद अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही स्टॉक के निस्तारण की अनुमति दी जाएगी। आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में पूरा स्टॉक राजकीय अभिरक्षा में लिया जाएगा।
कोडीन सिरप, पेन किलर और नारकोटिक्स एवं एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं के अवैध कारोबार पर विशेष नजर रखी जाएगी। जांच में यदि संगठित नेटवर्क या आपराधिक गतिविधि सामने आती है तो कार्रवाई केवल औषधि कानूनों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बीएनएस और एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं में भी मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। एफएसडीए ने औषधि निरीक्षकों को एसओपी के सभी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने और जांच में अनावश्यक देरी न करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का जोर केवल नकली दवा पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके स्रोत, सप्लायर, वितरक और पूरे नेटवर्क की पहचान कर अवैध कारोबार की पूरी श्रृंखला को तोड़ने पर है।
