Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं। इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।
रक्षाबंधन को लेकर शुभ मुहूर्त, भद्रा काल और चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित सुधांशु तिवारी के अनुसार रक्षाबंधन 2026 से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
Raksha Bandhan 2026: कब है सावन पूर्णिमा?
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी।
इसी पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस बार भद्रा का समय रक्षाबंधन के राखी बांधने वाले मुख्य समय से अलग रहेगा, इसलिए भद्रा को लेकर विशेष चिंता की आवश्यकता नहीं बताई गई है।
रक्षाबंधन 2026 पर भद्रा कब से कब तक?
पंचांग के अनुसार भद्रा काल 27 अगस्त सुबह 9:09 बजे से रात 9:25 बजे तक बताया गया है। रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा।इसलिए 28 अगस्त को राखी बांधने के समय भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। बहनें शुभ मुहूर्त में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं।
Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए अलग-अलग पंचांगों में शुभ समय बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- प्रातः शुभ मुहूर्त: सुबह 5:58 बजे से 10:53 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:28 बजे से 2:03 बजे तक
- अपराह्न काल: दोपहर 1:44 बजे से शाम 4:16 बजे तक
- चर चौघड़िया: शाम 5:13 बजे से 6:48 बजे तक
एक अन्य पंचांग गणना के अनुसार सुबह 6:23 बजे से 9:48 बजे तक भी राखी बांधने का शुभ समय बताया गया है।
नोट: राखी बांधने के मुहूर्त में शहर और पंचांग के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
राहुकाल में राखी बांधने से बचें
28 अगस्त को सुबह 10:12 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक राहुकाल बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।यदि सुबह राखी बांधना संभव न हो तो दोपहर या शाम के बताए गए शुभ मुहूर्त में रक्षा सूत्र बांधा जा सकता है।
रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का क्या असर होगा?
28 अगस्त को साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण होने की जानकारी दी गई है। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहने की बात कही गई है।हालांकि, यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा, इसलिए रक्षाबंधन के पर्व और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त पर इसका प्रभाव नहीं माना जाएगा।
रक्षाबंधन पर बन रहे हैं कई शुभ योग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार रक्षाबंधन को कई शुभ योगों का संयोग भी खास बना रहा है। शतभिषा नक्षत्र के साथ अतिगंड, शोभन, शिव और विजय योग बनने की बात कही जा रही है।इसके अलावा चंद्रादि, बुधादित्य, विमल, विपरीत राजयोग, धन, उभयचरी, शकट और सुनफा योग का भी उल्लेख किया गया है।ज्योतिषीय मान्यताओं में शुभ योगों को पूजा-पाठ, दान और रक्षा सूत्र बांधने जैसे धार्मिक कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है।
रक्षाबंधन पर ग्रहों की स्थिति कैसी रहेगी?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन के दिन सूर्य सिंह राशि, गुरु कर्क राशि और चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे।ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल, प्रतिष्ठा और ऊर्जा का कारक माना जाता है, जबकि गुरु को ज्ञान, शिक्षा, बुद्धि और समृद्धि से जोड़ा जाता है। ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के कारण इस दिन को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है।
Raksha Bandhan Puja Vidhi: ऐसे बांधें भाई को राखी
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने से पहले घर के मंदिर में पूजा की थाली तैयार करें।
- भगवान गणेश, भगवान विष्णु और अपने इष्टदेव की पूजा करें।
- सबसे पहले एक राखी भगवान गणेश या भगवान कृष्ण को अर्पित करें।
- भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठाएं।
- भाई के सिर पर रुमाल या कपड़ा रखें।
- माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएं और अक्षत लगाएं।
- भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें।
- दीपक से भाई की आरती उतारें।
- मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराएं।
- भाई बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और बहन की रक्षा का संकल्प करे।
- अंत में भाई अपनी बहन को उपहार दे सकता है।
कैसी होनी चाहिए राखी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षा सूत्र में लाल, पीले और सफेद रंग के तीन धागे होना शुभ माना जाता है। इसमें चंदन लगाया जाए तो इसे भी शुभ माना जाता है।
यदि विशेष रक्षासूत्र उपलब्ध न हो तो श्रद्धापूर्वक कलावा भी बांधा जा सकता है।
राखी बांधते समय करें इस मंत्र का जाप
रक्षाबंधन पर भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधते समय पारंपरिक रूप से इस मंत्र का जाप किया जाता है:
“येन बद्धो बलिराजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् प्रति बध्नामि रक्षे, मा चल मा चलः॥”
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंत्र के साथ रक्षा सूत्र बांधना भाई-बहन के बीच प्रेम और सुरक्षा की भावना का प्रतीक माना जाता है।
Raksha Bandhan 2026: एक नजर में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| रक्षाबंधन | 28 अगस्त 2026 |
| सावन पूर्णिमा शुरू | 27 अगस्त, सुबह 9:08 बजे |
| सावन पूर्णिमा समाप्त | 28 अगस्त, सुबह 9:48 बजे |
| भद्रा | 27 अगस्त, सुबह 9:09 से रात 9:25 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 12:04 से 12:53 बजे |
| शुभ चौघड़िया | दोपहर 12:28 से 2:03 बजे |
| चर चौघड़िया | शाम 5:13 से 6:48 बजे |
| चंद्र ग्रहण | 28 अगस्त, सुबह 6:53 से दोपहर 12:31 बजे |
| भारत में ग्रहण | दिखाई नहीं देगा |
