प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक हो गया है। इस मामले पर चल रही बयानबाजी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को एक ऐसा बयान दिया, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई। सीएम योगी ने बिना किसी का नाम लिए कालनेमी का जिक्र किया, जिसके बाद उनके बयान को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जोड़कर देखा जाने लगा। सीएम योगी के इस बयान पर अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी प्रतिक्रिया दी है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
सीएम योगी का ‘कालनेमी’ बयान
मेरठ में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने कहा कि“एक संत और संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सबसे ऊपर होते हैं। हमें उन कालनेमी से सावधान रहना होगा, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।”
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इस बयान के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वे धर्म की रक्षा के लिए किसी भी तरह के तंज या आरोप का सामना करने को तैयार हैं। उन्होंने 18 जनवरी की उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें पुलिस और उनके समर्थकों के बीच झड़प हुई थी। शंकराचार्य अब भी इस मांग पर अड़े हैं कि संतों के साथ कथित बदसलूकी करने वाले अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
सरकार के भीतर अलग-अलग सुर
जहां एक तरफ सीएम योगी का रुख सख्त दिख रहा है, वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बयान चर्चा में आ गया है। केशव मौर्य ने हाथ जोड़कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को “पूज्य शंकराचार्य जी” कहकर संबोधित किया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह सरकार की डैमेज कंट्रोल रणनीति है या केशव मौर्य की व्यक्तिगत श्रद्धा।
विपक्ष को मिला मुद्दा
इस पूरे विवाद ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। सपा नेता शिवपाल यादव और कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सरकार पर संतों के अपमान का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि जो सरकार संतों के सम्मान की बात करती थी, वही अब उन्हें राक्षस बताने जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही है।
कौन था कालनेमी?
कालनेमी का जिक्र रामायण और रामचरितमानस में मिलता है। वह एक मायावी दैत्य था और रावण का मित्र माना जाता था। रामकथा के अनुसार, रावण के कहने पर कालनेमी ने हनुमान जी को धोखे में डालने की कोशिश की, लेकिन अंत में उसका अंत हो गया।





