Home Madhya Pradesh उज्जैन की ‘महारानी’ कौन हैं? जानिए नगरकोट माता मंदिर की खास मान्यता...

उज्जैन की ‘महारानी’ कौन हैं? जानिए नगरकोट माता मंदिर की खास मान्यता और इतिहास

14
0

Ujjain को बाबा महाकाल की नगरी कहा जाता है। यहां स्थित Mahakaleshwar Temple में भगवान महाकाल को इस शहर का राजा माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जब महाकाल को उज्जैन का राजा कहा जाता है, तो इस नगरी की ‘रानी’ भी हैं—जिन्हें नगरकोट माता के रूप में पूजा जाता है।

उज्जैन में स्थित Nagarkot Mata Temple को शहर की महारानी का दर्जा दिया गया है। यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपने प्राचीन इतिहास के लिए भी बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं।

धार्मिक ग्रंथ Skanda Purana में भी नगरकोट माता का उल्लेख मिलता है। यहां माता को देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप के रूप में माना जाता है। मंदिर में माता को अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए दिखाया गया है, जो भक्तों को हर संकट से बचाने का प्रतीक है। इसी कारण यह मंदिर सिर्फ उज्जैन ही नहीं, बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है।

Also Read- मां बनने के बाद बदली कियारा आडवाणी की सोच, खुद को ‘शेरनी’ की तरह मानती हैं एक्ट्रेस

उज्जैन में नवरात्र का पर्व नगरकोट माता के बिना अधूरा माना जाता है। खासतौर पर चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन दिनों मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और माता का भव्य श्रृंगार किया जाता है। भक्त पूरे नौ दिनों तक पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद लेते हैं।

मंदिर परिसर में एक विशेष कुंड भी मौजूद है, जिसे बहुत चमत्कारी माना जाता है। श्रद्धालु इस कुंड के जल से माता का अभिषेक करते हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस जल में आध्यात्मिक शक्ति है, जो भक्तों की परेशानियों को दूर करने में मदद करती है।

एक खास परंपरा यह भी है कि जब उज्जैन में किसी सरकारी अधिकारी की नई नियुक्ति होती है, तो वह सबसे पहले नगरकोट माता के मंदिर में जाकर आशीर्वाद लेते हैं। इसे शुभ माना जाता है और विश्वास है कि इससे उनके कार्यों में सफलता मिलती है।

इस मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना है। कहा जाता है कि Vikramaditya के समय से ही यह मंदिर मौजूद है। नगरकोट माता को सम्राट विक्रमादित्य की कुलदेवी भी माना जाता है। मान्यता है कि वह किसी भी युद्ध या महत्वपूर्ण कार्य से पहले यहां आकर माता का आशीर्वाद जरूर लेते थे। उनके समय में इस मंदिर का विस्तार भी किया गया था।

मंदिर में माता की सुरक्षा के लिए Bhairav और Vishnu की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यह व्यवस्था दर्शाती है कि यह स्थान कितनी प्राचीन और महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र रहा है।

कुल मिलाकर, नगरकोट माता मंदिर उज्जैन की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा है। यहां आने वाले भक्त सिर्फ दर्शन ही नहीं करते, बल्कि अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति की उम्मीद भी लेकर आते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर को उज्जैन की ‘महारानी’ का स्थान दिया गया है और इसका महत्व सदियों से बना हुआ है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here