Hanuman Tekri Dham में आयोजित हनुमान जन्मोत्सव मेले के दौरान शुक्रवार को एक विवाद सामने आया, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। यह घटना मेले के दूसरे दिन हुई, जब कुछ झूला संचालकों पर आरोप लगा कि वे टेंट के अंदर मांसाहार (नॉनवेज) पका रहे थे और उसका सेवन कर रहे थे।
जैसे ही यह खबर फैली, बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग नाराज हो गए। उनका कहना था कि यह जगह आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, जहां इस तरह की गतिविधियां उचित नहीं हैं। देखते ही देखते मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।घटना की जानकारी मिलते ही Bajrang Dal के कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए। उन्होंने झूला संचालकों का विरोध किया और इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही, उन्होंने टेकरी ट्रस्ट के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए कि ऐसी घटना होने से पहले रोकथाम क्यों नहीं की गई।
Also Read- यूपी के विधायक के बेटे को कार में हूटर बजाना पड़ा महंगा
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और हालात को संभालने की कोशिश की। पुलिस ने विवाद बढ़ने से पहले ही आरोपित लोगों को हिरासत में लेकर कोतवाली भेज दिया। इससे स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित हो पाई।टेकरी ट्रस्ट की ओर से भी इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया गया है। ट्रस्ट के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल ने बताया कि झूला संचालकों को पिछले कई दिनों से नियमों और मर्यादा का पालन करने के लिए समझाया जा रहा था, लेकिन उन्होंने इन बातों को नजरअंदाज किया। उनका कहना है कि यह आस्था से जुड़ा स्थान है और यहां की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
इस घटना के बाद ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। अब भविष्य में हनुमान टेकरी धाम में लगने वाले मेलों में किसी भी तरह के झूलों को अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रस्ट का कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल धाम की गरिमा और परंपरा को बनाए रखने के लिए लिया गया है।स्थानीय लोगों का भी मानना है कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह की घटनाओं से बचना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों। वहीं, प्रशासन ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस घटना में और कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोबारा न हो।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि धार्मिक स्थलों पर नियमों और परंपराओं का पालन करना कितना जरूरी है। प्रशासन और ट्रस्ट दोनों ही अब आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी में हैं।




