यूपी पंचायत चुनाव के वोटर्स के लिए बड़ी खबर
उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव का इंतजार कर रहे करोड़ों मतदाताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है, राज्य निर्वाचन आयोग ने 10 जून को पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है, जिलास्तर पर प्रकाशित इस सूची में लाखों नए मतदाताओं को शामिल किया गया है, जिससे आगामी पंचायत चुनावों का गणित बदल सकता है, मतदाता सूची जारी होने के बाद पंचायत चुनाव की तैयारियों और राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
40 लाख से अधिक नए वोटर्स जुड़े
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, दावे-आपत्तियों के निस्तारण और व्यापक सत्यापन प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की गई है। प्रत्येक पंचायत मतदाता को 9 अंकों का पहचान नंबर भी प्रदान किया गया है।
आंकड़ों के मुताबिक:
- फाइनल वोटर लिस्ट में करीब 1.81 करोड़ नए मतदाता जोड़े गए हैं।
- लगभग 1.41 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
- कुल मिलाकर पंचायत मतदाता सूची में करीब 40.19 लाख मतदाताओं की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हालांकि कई जिलों में तकनीकी खामियों के कारण मतदाता सूची डाउनलोड करने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पंचायत चुनाव की तारीख अब तक तय नहीं
गौरतलब है कि प्रदेश के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है, पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने के कारण राज्य सरकार ने मौजूदा प्रधानों को अगले छह महीनों तक प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग को जिलावार सामाजिक और आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर आरक्षण संबंधी रिपोर्ट सौंपने का दायित्व दिया गया है।
हाईकोर्ट में लंबित है पंचायत चुनाव का मामला
उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव जल्द कराने को लेकर मामला फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है, कोर्ट ने पिछड़ा वर्ग आयोग को जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, यदि आयोग अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय से देरी से सौंपता है, तो पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराना मुश्किल हो सकता है, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले वर्ष फरवरी-मार्च में प्रस्तावित माने जा रहे हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराना चुनौती
राजनीतिक दलों के सामने पंचायत चुनाव को लेकर एक अलग चुनौती भी है। पंचायत चुनाव गैर-दलीय आधार पर लड़े जाते हैं, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर गुटबाजी और वर्चस्व की राजनीति बढ़ जाती है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होने पर कई दलों के संगठनात्मक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं, यही वजह है कि पंचायत चुनाव के समय और प्रक्रिया को लेकर लगातार चर्चाएं जारी हैं।
क्या होंगे अगले कदम?
फाइनल मतदाता सूची जारी होने के बाद अब सभी की नजरें पंचायत चुनाव की तारीखों और ओबीसी आरक्षण पर आने वाली आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। आयोग की रिपोर्ट और न्यायालय के फैसले के बाद ही पंचायत चुनाव की दिशा और समय-सीमा स्पष्ट हो सकेगी।






