बिहार में तिरंगा यात्रा देशभक्ति के संदेश से ज्यादा अब सियासी सवालों की वजह बन गई है। पटना में सरकार की ओर से आयोजित भव्य तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पूरी मजबूती के साथ नजर आए, लेकिन NDA सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी।
10 अगस्त को जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक निकली इस यात्रा का आयोजन राज्य सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग ने किया था। ‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’ के लिए कैबिनेट ने 6.12 करोड़ रुपये के खर्च को भी मंजूरी दी थी। यानी यह BJP का निजी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकारी आयोजन था।
फिर सवाल उठता है सरकारी कार्यक्रम था तो JDU के दोनों बड़े चेहरे मंच से गायब क्यों रहे?उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के पटना से बाहर होने और बिजेंद्र प्रसाद यादव के स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। चर्चा है कि मंच पर दोनों नेताओं के नाम की नेम प्लेट मौजूद थीं, जिन्हें बाद में हटाना पड़ा।अब विपक्ष को बैठे-बिठाए NDA पर हमला करने का मौका मिल गया है। सवाल सिर्फ दो नेताओं की गैरमौजूदगी का नहीं, बल्कि गठबंधन की राजनीतिक केमिस्ट्री का है।एक साल पहले BJP ने अपनी तिरंगा यात्रा अलग से निकाली थी। इस बार सरकारी आयोजन में JDU की दूरी क्या सिर्फ संयोग है?या फिर तिरंगे के पीछे गठबंधन की सियासत में कोई और रंग गहरा हो रहा है?






