देशभर में 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। राजधानी दिल्ली के लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा फहराया और देश को संबोधित किया, समारोह में सरकार के साथ-साथ विभिन्न संवैधानिक पदों पर मौजूद कई प्रमुख लोग शामिल हुए। हालांकि, कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के समारोह में नजर नहीं आने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
लाल किले पर मौजूद रहे कई बड़े नेता
स्वतंत्रता दिवस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, इसके अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव पीके मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी समारोह में शामिल हुए, राहुल गांधी की गैरमौजूदगी को लेकर बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाए और इसे लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा।
प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी और खरगे पर साधा निशाना
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों को दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए, उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से विपक्ष के कुछ नेता इन कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं। जोशी ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय समारोहों में विपक्ष की भागीदारी लोकतांत्रिक परंपरा के लिए महत्वपूर्ण है।
बीजेपी प्रवक्ता ने भी उठाए सवाल
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता का इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समारोह से दूर रहना उचित नहीं है, भंडारी ने राहुल गांधी की विचारधारा और उनके राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय पर्वों के कार्यक्रमों को राजनीतिक मतभेदों से अलग रखा जाना चाहिए।
गैरमौजूदगी पर बढ़ी सियासी बयानबाजी
लाल किले के समारोह में राहुल गांधी की अनुपस्थिति के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है, बीजेपी ने जहां इसे राष्ट्रीय पर्व के प्रति विपक्ष के रवैये से जोड़कर सवाल उठाए, वहीं इस मामले पर कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी की गैरमौजूदगी को लेकर अलग स्पष्टीकरण सामने आ सकता है, स्वतंत्रता दिवस का लाल किला समारोह देश के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों में से एक है, जिसमें प्रधानमंत्री के संबोधन के साथ देश के राजनीतिक और संवैधानिक नेतृत्व की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।