एक तरफ जहां देश की सड़कों पर यूजीसी आरक्षण और scst एक्ट को लेकर बवाल मचा हुआ है,, सामान्य जाति के लोग सड़कों पर हुंकार भर रहे हैं,, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी खबर सामने आ रही है जो सामान्य जाति के भविष्य पर एक और बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।
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बीजेपी के सहयोगी दल TDP के नेता और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू अब राज्य में SC/ST एक्ट की तर्ज पर ‘BC Protection Act’ (पिछड़ा वर्ग संरक्षण अधिनियम) लाने की तैयारी कर रहे हैं।यानी, अब दलित और आदिवासी समाज के कानूनों के बाद पिछड़े वर्ग के लिए भी एक ऐसा कड़ा कानून तैयार किया जा रहा है, जिसमें थाने में सिर्फ शिकायत दर्ज होते ही किसी को भी आरोपी बनाकर जेल की सलाखों के पीछे धकेला जा सकता है। अगर किसी ने जाति या काम के नाम पर अपमान की शिकायत कर दी, तो उसे तुरंत गैर-जमानती और दंडनीय अपराध मान लिया जाएगा। लेकिन सबसे बड़ा और कड़वा सवाल यह है कि आखिर देश का सामान्य वर्ग कब तक इस ‘वोट बैंक पॉलिटिक्स’ का शिकार बनता रहेगा? अगर आंध्र प्रदेश के जनसांख्यिकी (Demographics) आंकड़ों पर नज़र डालें, तो राज्य में पिछड़े वर्ग (BC) की आबादी लगभग 50% से अधिक है, SC/ST समाज 23% है, और सामान्य वर्ग की जनसंख्या मात्र 23% है। अब सवाल यह उठता है कि क्या 50% आबादी को तथाकथित सुरक्षा देने के नाम पर 23% सामान्य वर्ग को पूरी तरह कानूनी शिकंजे में कसने की तैयारी की जा रही है? क्या हर राज्य, हर शहर और पूरे देश में सामान्य वर्ग का व्यक्ति हमेशा गलत ही होता है? क्या वह हर किसी का अपमान ही करता है, या फिर राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने के लिए सामान्य जाति के अधिकारों और आत्मसम्मान की बलि चढ़ा रहे हैं? ताजा अपडेट के मुताबिक, राज्य के न्याय विभाग ने इस ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री एस. सविता के नेतृत्व में इसे विधानसभा में पेश करने की तैयारी जोरों पर है। इसके साथ ही स्थानीय चुनावों में भी बीसी आरक्षण को बढ़ाकर 34% करने का फैसला ले लिया गया है। क़ानूनी और सामान्य वर्ग के बुद्धिजीवियों का मानना है कि पहले से मौजूद कानूनों का दुरुपयोग किसी से छिपा नहीं है, और अब एक और ऐसा कानून लाना फर्जी मुकदमों, ब्लैकमेलिंग और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का काम करेगा। जब हर मोड़ पर आरक्षण और कड़े कानूनों का ही दायरा बढ़ता जाएगा, तो प्रतिभा और योग्यता के बल पर जीने वाले सामान्य वर्ग के युवाओं के पास इस देश में क्या अधिकार बचेंगे?