देश की राजधानी दिल्ली में फिर मचने वाला है भारी बवाल… और क्या सत्ता की कुर्सी को हिला देगा सवर्णों का यह सबसे बड़ा आक्रोश? जी हां, ‘आरक्षण हटाओ, देश बचाओ’ के गूंजते नारों के साथ सामान्य जाति के लाखों लोग दिल्ली कूच करने को पूरी तरह तैयार हैं! वोट बैंक की राजनीति करने वाली तमाम पार्टियों की नींद उड़ी हुई है और दिल्ली में सुरक्षा की भारी व्यवस्था के बीच पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड़ पर है।
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राजधानी में एक बार फिर बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलने वाला है, जहाँ सामान्य जाति यानी ब्राह्मण, क्षत्रिय और कायस्थ समाज के कई बड़े दिग्गज संगठन इस बार सीधी लड़ाई के मूड में हैं। इस विशाल आंदोलन में महिपाल सिंह मकराना, सूरजपाल अम्मू, आनंद मोहन सिंह, अनिल मिश्रा, राजेंद्र नाथ त्रिपाठी और परशुराम दल जैसे बड़े संगठन एक मंच पर आ रहे हैं, और इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व हर्ष दुबे और आदित्य राज सिंह कर रहे हैं। आपको याद दिला दें कि बीते दिनों कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में पेपर लीक को लेकर दिल्ली में भारी प्रदर्शन हुआ था, जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देखने को मिला था। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह नया आंदोलन उससे भी ज्यादा बेजोड़ और असरदार साबित होता है? सामान्य जाति के प्रदर्शनकारियों का सीधा कहना है कि आरक्षण और यूजीसी (UGC) नियमों के चलते उनके बच्चों का भविष्य अधर में लटक रहा है। उन्होंने सरकार को साफ अल्टीमेटम दिया है कि जब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, वे सड़कों पर यूं ही डटे रहेंगे और आने वाले चुनावों में अपनी वोट की ताकत से हर उस पार्टी को चोट पहुंचाएंगे जो उनके साथ खड़ी नहीं होगी। बात सिर्फ कल के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, आने वाली 23 तारीख को भी यूजीसी को लेकर एक विशाल सवर्ण महापंचायत आयोजित की जा रही है, जिसके लिए राज शेखावत वाहन यात्रा के जरिए गांव-गांव जाकर सामान्य जाति के लोगों को दिल्ली पहुंचने का न्योता दे रहे हैं। कुल मिलाकर तस्वीर बिल्कुल साफ है—जो सवर्ण जाति कभी सरकार का कोर वोटर मानी जाती थी, आज वही यूजीसी, आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट से नाराज होकर आर-पार के मूड में है! अब देखना यह होगा कि क्या कल दिल्ली की सड़कों पर उतरने वाला यह जनसैलाब सरकार को झुकने पर मजबूर कर पाएगा, या फिर यह भी एक आम आंदोलन की तरह शुरू होकर खत्म हो जाएगा!