लखनऊ, 24 अगस्त। उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाओं की आर्थिक ताकत अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला समूहों की पांच मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों ने वर्ष 2019 से अब तक 5,716.26 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इन कंपनियों से 3.88 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। महिला कारोबारियों का नेटवर्क प्रदेश के 31 जिलों के 6,603 गांवों तक पहुंच चुका है।
दुग्ध उत्पादन से लेकर दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए हैं। वर्तमान में इन महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। इससे पशुपालन को संगठित कारोबार के रूप में बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण महिलाओं को नियमित आय का जरिया भी मिल रहा है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को केवल स्वयं सहायता समूहों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यम और कंपनी संचालन से जोड़ने की रणनीति का असर अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं दुग्ध उत्पादन को आय के स्थायी साधन के रूप में अपना रही हैं। संगठित दूध संग्रहण और विपणन व्यवस्था ने उन्हें स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराया है, जिससे उनकी मेहनत को बेहतर आर्थिक मूल्य मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि दुग्ध उत्पादक महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनकर उभर रही हैं। महिला समूहों के माध्यम से गठित कंपनियां महिलाओं को उत्पादन से लेकर कारोबार तक की पूरी श्रृंखला से जोड़ रही हैं। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ गांवों में आर्थिक गतिविधियों का भी विस्तार हो रहा है।
महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों के जरिए प्रतिदिन 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण इस मॉडल की व्यापकता को दर्शाता है। हजारों महिलाएं पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़कर नियमित रूप से दूध उपलब्ध करा रही हैं। व्यवस्थित संग्रहण व्यवस्था के कारण दूध को बाजार तक पहुंचाना आसान हुआ है और पशुपालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
महिला समूहों की पांच कंपनियों का 5,716.26 करोड़ रुपये का कारोबार इस बात का संकेत है कि स्वयं सहायता समूह अब केवल बचत और छोटे ऋण तक सीमित नहीं हैं। वे उत्पादन, बाजार और कारोबार से जुड़ी संगठित कारोबारी इकाइयों के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। इस मॉडल के माध्यम से महिलाओं में उद्यमिता, नेतृत्व और कारोबारी समझ भी विकसित हो रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन इसी पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आया है।
ग्रामीण महिलाओं को उत्पादन, उद्यम और बाजार से जोड़ने का यह प्रयास उत्तर प्रदेश की व्यापक आर्थिक विकास की रणनीति से भी जुड़ा है। महिलाओं की आय बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति मजबूत होती है और स्थानीय बाजार में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है। महिला समूहों की कंपनियों का हजारों करोड़ रुपये का कारोबार प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित पांच मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों में बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड शामिल हैं।
इन कंपनियों का कारोबार बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र, वाराणसी, प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी, कानपुर नगर, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर तक पहुंच चुका है।
महिला समूहों की इन कंपनियों का बढ़ता कारोबार ग्रामीण भारत में महिला सशक्तीकरण की नई तस्वीर पेश कर रहा है। दूध के कारोबार के जरिए महिलाएं न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि गांवों में रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती दे रही हैं। यह मॉडल उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
