आगरा का परशुराम चौक आज अचानक रणभूमि में बदल गया, जब ब्राह्मण समाज और पुलिस के बीच जमकर धक्का-मुक्की और तीखी झड़प देखने को मिली। विवाद की वजह बनी वह घटना, जिसमें कुछ अराजक तत्वों द्वारा आंबेडकर जयंती के दिन भगवान परशुराम की मूर्ति के पास नीला झंडा लगाने और कथित तौर पर बदसलूकी करने की बात सामने आई। जैसे ही यह खबर फैली, ब्राह्मण समाज में जबरदस्त रोष व्याप्त हो गया और लोग बड़ी संख्या में चौक पर इकट्ठा हो गए। बताया जा रहा है कि अंबेडकर जयंती के मौके पर कुछ लोग सिर पर नीला झंडा और हाथों में झंडे लेकर पहुंचे और वहां लगे धार्मिक झंडों को हटाने की कोशिश की। आरोप है कि उन्होंने परशुराम जी की मूर्ति के पास अपने झंडे लगाने की कोशिश की, जिससे विवाद भड़क गया।

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इस दौरान भीम आर्मी से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने करीब आधे घंटे तक जमकर हंगामा किया और उत्तेजित नारेबाजी की। यह पूरा विवाद उस समय हुआ जब ब्राह्मण समाज द्वारा चौक पर आर्यभट्ट जयंती के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद अचानक माहौल बिगड़ गया और देखते ही देखते टकराव की स्थिति बन गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के उग्र होने पर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उपद्रवियों ने सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। ब्राह्मण समाज लगातार मांग कर रहा है कि इस घटना में शामिल अराजक तत्वों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए, वरना माहौल और खराब हो सकता है। फिलहाल स्थिति को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। वहीं, देश के अन्य हिस्सों में भी अंबेडकर जयंती के दौरान तनाव की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें ग्वालियर, लखीमपुर खीरी और कासगंज का नाम भी शामिल है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये घटनाएं महज संयोग हैं या फिर कहीं न कहीं माहौल बिगाड़ने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा। फिलहाल प्रशासन सतर्क है और पूरे मामले की जांच जारी है।






