देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र में तीन अहम बिल लाए जाने की तैयारी है। इनमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना, परिसीमन यानी नए चुनावी क्षेत्र तय करना और महिला आरक्षण कानून लागू करना शामिल है।
अगर ये बिल पास होते हैं, तो लोकसभा की मौजूदा 543 सीटें बढ़कर 850 तक हो सकती हैं। साथ ही महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। हालांकि इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है।
1952 से अब तक कितना बदला देश?
जब 1952 में देश में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए थे, तब कुल 489 सीटें थीं और भारत की आबादी करीब 36 करोड़ थी। आज देश की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, लेकिन लोकसभा सीटें पिछले कई दशकों से 543 ही हैं।अब सरकार का कहना है कि बढ़ती आबादी के हिसाब से संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ाना जरूरी है।
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सरकार क्यों ला रही है 3 नए बिल?
2023 में महिला आरक्षण कानून पास हो चुका था, लेकिन उसमें शर्त थी कि नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू होगा। इसी वजह से इसे लागू होने में काफी समय लग सकता था।
अब सरकार तीन नए बिल लाकर यह प्रक्रिया तेज करना चाहती है:
- संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026
- परिसीमन बिल, 2026
- केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल, 2026
लोकसभा सीटें 850 क्यों की जा रही हैं?
मौजूदा समय में एक सांसद औसतन 25 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। पहले यह संख्या करीब 10 लाख थी। ऐसे में सीटें बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी।
नई योजना के मुताबिक:
- राज्यों के लिए 815 सीटें
- केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें
कुल मिलाकर लोकसभा की सीटें 850 तक हो सकती हैं।
महिला आरक्षण कब लागू होगा?
सरकार चाहती है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू हो जाए। इसके तहत:
- लोकसभा में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी
- राज्य विधानसभाओं में भी 33% आरक्षण मिलेगा
- दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर में भी लागू होगा
आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी।
परिसीमन क्या है?
परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के हिसाब से चुनावी क्षेत्रों की नई सीमा तय करना। यानी किस राज्य में कितनी सीटें होंगी और किस क्षेत्र से चुनाव होगा, यह तय किया जाएगा।
सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती है ताकि प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके।
दक्षिण भारत के राज्यों को क्यों चिंता है?
तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना जैसे राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण पर बेहतर काम किया है। इन राज्यों को डर है कि अगर आबादी के आधार पर सीटें बांटी गईं, तो उनकी हिस्सेदारी घट सकती है और उत्तर भारत के राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और बिहार को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है।
क्या कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
आमतौर पर परिसीमन आयोग के फैसले अंतिम माने जाते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर फैसला पूरी तरह मनमाना हो या संविधान के खिलाफ हो, तो न्यायिक समीक्षा संभव है।
बिल पास होना आसान है या मुश्किल?
संविधान संशोधन के लिए संसद में विशेष बहुमत चाहिए। यानी सरकार को विपक्ष के कुछ दलों का समर्थन भी चाहिए होगा।
NDA के पास संख्या बल है, लेकिन अकेले बिल पास कराना आसान नहीं माना जा रहा। विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन पर सवाल उठा रहा है।
देश की राजनीति पर क्या असर होगा?
अगर ये तीनों बिल पास होते हैं, तो:
- संसद में सांसदों की संख्या बढ़ेगी
- महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी
- राज्यों की राजनीतिक ताकत बदल सकती है
- 2029 चुनाव नए नक्शे पर हो सकते हैं
यही वजह है कि इसे भारतीय राजनीति का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।






