उत्तराखंड सरकार की नई पहल: जंगल की आग बुझाने वालों को मिलेगा ₹1 लाख तक इनाम
उत्तराखंड सरकार ने जंगलों की आग पर नियंत्रण और उसे बुझाने में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों और टीमों को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना तैयार की है, इस योजना के तहत सफल प्रयास करने वालों को ₹51,000 से लेकर ₹1 लाख तक का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
वन विभाग द्वारा पेश की गई “Forest Fire Control and Management 2026” रणनीति के तहत फायर सीजन खत्म होने के बाद हर जिले में तीन श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे:
- प्रथम पुरस्कार: ₹1,00,000
- द्वितीय पुरस्कार: ₹75,000
- तृतीय पुरस्कार: ₹51,000
इस योजना का उद्देश्य आम नागरिकों, वनकर्मियों और स्वयं सहायता समूहों को जंगल बचाने के लिए प्रेरित करना है।
पिछले 10 वर्षों में उत्तराखंड में स्थिति गंभीर रही है:
- 14,638 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज
- 23,682 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित
- 35 लोगों की मौत
- 76 लोग घायल
साल 2026 में अब तक 394 घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें एक मौत भी हुई है।
बढ़ते खतरे की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार वनाग्नि बढ़ने के पीछे प्रमुख कारण हैं:
- बढ़ता वैश्विक तापमान
- लंबे सूखे मौसम
- अनियमित मानसून
- अल नीनो जैसी जलवायु परिस्थितियाँ
IMD ने भी आने वाले समय में तापमान बढ़ने की चेतावनी दी है।
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चमोली जिले में जंगल की आग ने एक दर्दनाक घटना को जन्म दिया, जहां 50 वर्षीय महिला सुरेशी देवी की जलकर मौत हो गई। वहीं एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।
सरकार की बड़ी तैयारी
उत्तराखंड सरकार ने इस बार व्यापक स्तर पर तैयारी की है:
- 5,625 फायर वॉचर्स की तैनाती
- 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा
- कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की स्थापना
- “Forest Fire” मोबाइल ऐप लॉन्च
- हेल्पलाइन नंबर 1926 जारी
- 496 ग्राम स्तरीय फायर प्रोटेक्शन कमेटियां
पिरूल योजना: समस्या से समाधान तक
चीड़ की सूखी पत्तियां (पिरूल), जो आग का बड़ा कारण बनती हैं, अब कमाई का जरिया भी बन रही हैं:
- ₹10 प्रति किलो भुगतान योजना
- 9 पिरूल आधारित यूनिट्स सक्रिय
- हजारों टन पिरूल का संग्रह
उत्तराखंड सरकार की यह योजना न सिर्फ जंगलों की आग पर नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाकर पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत किया जा रहा है।






