उत्तराखंड के सीमांत जनपद उत्तरकाशी में अब खेती केवल पारंपरिक आजीविका नहीं रही, बल्कि यह आधुनिक बागवानी और नकदी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रही है, जिला प्रशासन द्वारा कीवी उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनाने के प्रयासों के बीच विकासखंड डुंडा के ग्राम उदलका के प्रगतिशील किसान जयवीर सिंह राणा एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं,जिला प्रशासन की पहल और किसानों की भागीदारी मिलकर इस क्षेत्र को कीवी मिशन की दिशा में आगे बढ़ा रही है, जिससे पहाड़ की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद बढ़ी है।
विविध कृषि का सफल मॉडल बना उदलका का खेत
जयवीर सिंह राणा ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अपने खेतों को एक मिश्रित एवं आधुनिक कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया है, उनके खेत में विविध प्रकार की बागवानी और कृषि गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं:
- लगभग 100 हरीमन-99 सेब के पौधे
- करीब 200 अनार (सिंदूरी एवं भगवा किस्म)
- 200 सैंटा रोजा प्लम के पौधे
- 100 आड़ू, नेक्ट्रिन और शान-ए-पंजाब प्रजाति
- 100 यूरेका लेमन (सीडलेस) बारहमासी नींबू
- एवोकाडो, जापानी फल और अमरूद की खेती
- शतावर, अश्वगंधा, सर्पगंधा, काली हल्दी, पीली हल्दी जैसे औषधीय पौधे
- मौसमी सब्जियों का उत्पादन
- पशुपालन, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन
इन सभी गतिविधियों के बीच उनका मुख्य फोकस कीवी बागवानी पर है, जिसे वे भविष्य की सबसे लाभकारी नकदी फसल मानते हैं।
कीवी बागवानी: भविष्य की आर्थिक रीढ़
जयवीर सिंह राणा ने अपने खेतों में कीवी के पौधों का रोपण कर यह साबित किया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में यह फसल अत्यंत संभावनाशील है, उनका मानना है कि “यदि किसानों को वैज्ञानिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिले, तो कीवी खेती पहाड़ की अर्थव्यवस्था को बदल सकती है,” इसके साथ ही वे चेरी और अखरोट की बागवानी पर भी कार्य कर रहे हैं, जिससे उनकी कृषि प्रणाली और अधिक मजबूत बन रही है।
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प्रशासनिक पहल और कीवी मिशन
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कीवी मिशन को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
- छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाए
- चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो
- अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ा जाए
- तकनीकी मार्गदर्शन लगातार उपलब्ध कराया जाए
यह पहल उत्तरकाशी में उच्च मूल्य वाली फसलों के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की शुरुआत
जयवीर सिंह राणा जैसे प्रगतिशील किसान यह साबित कर रहे हैं कि यदि खेती को आधुनिक तकनीक, विविधीकरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अपनाया जाए तो पहाड़ों में भी समृद्धि संभव है, कीवी बागवानी को केंद्र में रखकर किया जा रहा यह प्रयास न केवल व्यक्तिगत आय बढ़ा रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए रोजगार और विकास के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।
उत्तरकाशी में चल रहा कीवी मिशन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र उत्तराखंड का प्रमुख कीवी उत्पादन केंद्र बन सकता है, जयवीर सिंह राणा जैसे किसान इस परिवर्तन के अग्रदूत हैं, जो पहाड़ की खेती को नई पहचान दिला रहे हैं।






