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शाह और मोदी के चेलों के गुरु निकले योगी! देश की राजनीति में होगा बड़ा विस्फोट ?

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“योगी को रोकने निकले थे, लेकिन खुद योगी मॉडल के मुरीद बन गए! जिन नेताओं को दिल्ली की रणनीति का नया चेहरा बताया जा रहा था, वही अब लखनऊ पहुंचकर योगी का फॉर्मूला सीख रहे हैं। बंगाल में बुलडोजर से लेकर माफियाओं की परेड तक, यूपी के कई मॉडल लागू हो चुके हैं और अब नंबर वन बने डायल-112 सिस्टम को समझने के लिए बंगाल के अफसर लखनऊ पहुंचे हैं।

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ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या योगी आदित्यनाथ सिर्फ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं या फिर देश की राजनीति का ऐसा चेहरा बन चुके हैं, जिसका असर दूसरे राज्यों तक दिखाई देने लगा है?” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। विरोधी उन पर सवाल उठाते हैं, लेकिन समर्थकों का दावा है कि जिन मुद्दों को लेकर उन पर हमला किया जाता है, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनते जा रहे हैं। यही वजह है कि आज योगी आदित्यनाथ को देश के सबसे चर्चित मुख्यमंत्रियों में गिना जाता है और भविष्य की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर भी अटकलें लगाई जाती हैं। अब चर्चा पश्चिम बंगाल की है। बीजेपी के नेता शुभेंदु अधिकारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को पार्टी के बड़े हिंदुत्ववादी चेहरों के तौर पर देखा जाता है। राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जाता रहा कि इन नेताओं को आगे लाकर योगी आदित्यनाथ के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश की गई। लेकिन तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। याद कीजिए, बंगाल चुनाव के दौरान शुभेंदु अधिकारी का वह वीडियो, जिसमें वह योगी आदित्यनाथ के चरण स्पर्श करते नजर आए थे। वह वीडियो काफी चर्चा में रहा। अब एक बार फिर शुभेंदु अधिकारी योगी मॉडल की खुलकर तारीफ करते दिखाई दे रहे हैं और बंगाल में उत्तर प्रदेश की कई व्यवस्थाओं को लागू करने की बात हो रही है। समर्थकों का तर्क है कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश भी अपराध, माफिया, जमीन कब्जा और सांप्रदायिक तनाव जैसे मुद्दों से जूझ रहा था। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में बदलाव देखने को मिला और इसी मॉडल की चर्चा अब दूसरे राज्यों में भी होने लगी है। सबसे पहले बुलडोजर कार्रवाई की नीति चर्चा में आई। फिर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली और संपत्ति जब्त करने जैसी व्यवस्था पर जोर दिया गया।

अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सार्वजनिक रूप से कानून का संदेश देने की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं। लेकिन अब सबसे ज्यादा ध्यान यूपी के डायल-112 सिस्टम पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम बंगाल पुलिस के आईजी स्तर के अधिकारी सुकेश जैन के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम लखनऊ पहुंची और यूपी-112 मुख्यालय का दौरा किया। टीम ने कंट्रोल रूम, तकनीकी व्यवस्था और रिस्पांस सिस्टम को समझा ताकि इसी तरह की व्यवस्था बंगाल में भी विकसित की जा सके। यूपी-112 की सबसे बड़ी खासियत इसका सेंट्रलाइज सिस्टम माना जाता है। यदि एक लाइन व्यस्त होती है तो कॉल अपने आप दूसरी लाइन पर ट्रांसफर हो जाती है। शिकायतकर्ता की लोकेशन के आधार पर तुरंत नजदीकी टीम को सूचना भेजी जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार यूपी-112 का औसत रिस्पांस टाइम करीब 6 मिनट 30 सेकंड बताया जाता है। यही वजह है कि बंगाल में भी इस मॉडल को अपनाने की चर्चा हो रही है। शुभेंदु अधिकारी की ओर से कानून व्यवस्था को मजबूत करने और माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात लगातार कही जाती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ के समर्थक इसी को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताते हैं। उनका कहना है कि विरोधियों की कमी नहीं है, पार्टी के भीतर भी अलग-अलग धाराएं हैं और बाहर भी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मौजूद हैं, लेकिन योगी आदित्यनाथ अपने काम और प्रशासनिक शैली के कारण अलग पहचान बनाए हुए हैं। इसीलिए 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2029 की राष्ट्रीय राजनीति को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि यूपी में कौन जीतेगा, बल्कि यह भी है कि मोदी के बाद बीजेपी में अगला बड़ा चेहरा कौन होगा। और शायद यही वजह है कि आज राजनीति में एक सवाल बार-बार सुनाई देता है—क्या योगी आदित्यनाथ सिर्फ एक मुख्यमंत्री हैं, या फिर वह एक ऐसा मॉडल बन चुके हैं, जिसे दूसरे राज्य भी अपनाने की कोशिश कर रहे हैं?