उत्तर प्रदेश बीजेपी की नई टीम का ऐलान होते ही सियासत गरमा गई है। हर तरफ एक ही सवाल पूछा जा रहा है—क्या पंकज चौधरी ने संगठन बनाया है या 2027 का चुनावी गणित तैयार कर दिया है? आखिर किस जाति को सबसे ज्यादा ताकत मिली और किसका कद घटा? क्या बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले का जवाब अपनी नई टीम से दे दिया है?
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आइए बताते हैं कि आखिर पंकज चौधरी की नई टीम में किस जाति का सबसे ज्यादा दबदबा देखने को मिला। उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 64 पदाधिकारियों वाली अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। मुख्य प्रदेश कार्यकारिणी में 52 नेताओं को जगह मिली है, जिनमें 19 उपाध्यक्ष, 19 मंत्री, 8 महामंत्री और 6 मोर्चा अध्यक्ष शामिल हैं। अगर जातीय समीकरण देखें तो सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व ओबीसी समाज को मिला है। पिछली टीम में जहां 16 ओबीसी नेता थे, वहीं इस बार उनकी संख्या बढ़कर 25 हो गई है। खुद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी कुर्मी समाज से आते हैं। इसके बाद राजपूत समाज के 7, ब्राह्मण समाज के 7 और दलित समाज के 7 नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां दी गई हैं। भाजपा युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्रा को बनाया गया है, जो ब्राह्मण समाज से आते हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की बड़ी सामाजिक रणनीति मान रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी ने पिछड़े वर्ग को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है, वहीं सामान्य वर्ग और दलित समाज को भी प्रतिनिधित्व देकर संतुलन साधने का प्रयास किया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पंकज चौधरी की यह नई टीम 2027 में बीजेपी की चुनावी नैया पार लगाएगी या विपक्ष के सामने नई चुनौतियों का सामना करेगी।






