उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री नव प्रभात ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि SIR लागू करने से पहले राजनीतिक दलों और आम जनता को इसकी विस्तृत जानकारी दी जानी चाहिए थी। नव प्रभात ने कहा कि यदि पूरी प्रक्रिया कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के जरिए संचालित की जानी थी, तो इसकी जानकारी पहले से सार्वजनिक करना आवश्यक था।
उन्होंने बताया कि प्री-SIR के दौरान BLO ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया था। इस दौरान वर्ष 2003 और 2025 की मतदाता सूचियों का मिलान किया गया तथा जहां भी गड़बड़ियां मिलीं, संबंधित मतदाताओं को इसकी जानकारी दी गई। साथ ही डुप्लीकेट नाम, मृतक मतदाताओं और स्थान परिवर्तन कर चुके लोगों के नाम सूची से हटाए गए। उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया मैनुअल तरीके से संपन्न हुई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब SIR लागू होने के बाद मतदाताओं को कंप्यूटर जनरेटेड नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिनमें विसंगतियों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। इससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि नोटिसों में मतदाताओं से 12 प्रकार के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं और अलग-अलग आयु वर्ग के लिए अलग-अलग प्रमाण निर्धारित किए गए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2003 के फैमिली रजिस्टर जैसे पुराने दस्तावेज जुटाना आम लोगों के लिए बेहद कठिन है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।






