लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले लोधी समाज के वोट बैंक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की जयंती के मौके पर लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेताओं की मौजूदगी ने इस सियासी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया।एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत बीजेपी के कई नेता हजरतगंज स्थित रानी अवंती बाई लोधी की प्रतिमा पर पहुंचे और माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से निकलने के बाद अखिलेश यादव भी सपा नेताओं और समर्थकों के साथ उसी प्रतिमा स्थल पर पहुंचे।दोनों दलों के नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी से मौके पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।
योगी आदित्यनाथ ने रानी अवंती बाई के योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रानी अवंती बाई लोधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनकी वीरता और योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि वीरांगना अवंती बाई का जीवन और उनका आदर्श उत्तर प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।मुख्यमंत्री ने इस दौरान बताया कि बदायूं में वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर पीएसी की नई वाहिनी का गठन किया गया है।बीजेपी की ओर से रानी अवंती बाई की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को उनके योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ लोधी समाज से जुड़ाव के तौर पर भी देखा जा रहा है।
योगी के बाद अवंती बाई की प्रतिमा पर पहुंचे अखिलेश यादव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के बाद समाजवादी पार्टी का भी बड़ा हुजूम रानी अवंती बाई की प्रतिमा के पास पहुंचा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर वीरांगना को श्रद्धांजलि दी।अखिलेश यादव ने रानी अवंती बाई की वीरता को याद करते हुए कहा कि देश उनके साहस और संघर्ष को हमेशा याद रखेगा।सपा के इस कार्यक्रम को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले लोधी समाज तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
2027 से पहले लोधी वोट पर क्यों है बीजेपी और सपा की नजर?
उत्तर प्रदेश में लोधी समाज को प्रभावशाली पिछड़ा वर्ग माना जाता है। राज्य की कई विधानसभा सीटों पर इस समुदाय की चुनावी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही वजह है कि बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों ही लोधी समाज को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही हैं।बीजेपी के पास लोधी समाज के बीच लंबे समय से राजनीतिक आधार रहा है, जबकि समाजवादी पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के व्यापक सामाजिक समीकरण में लोधी समाज को भी जोड़ने की कोशिश कर रही है।हालांकि, किसी समुदाय का चुनावी रुख एकरूप नहीं होता और क्षेत्र, उम्मीदवार तथा स्थानीय राजनीतिक समीकरण के अनुसार मतदाताओं का रुझान बदल सकता है।
कल्याण सिंह के बाद लोधी राजनीति में बदला समीकरण
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को लोधी समाज का प्रमुख और सर्वमान्य राजनीतिक चेहरा माना जाता रहा है। उनके निधन के बाद लोधी समाज के राजनीतिक नेतृत्व और वोट बैंक को लेकर नए समीकरणों की चर्चा लगातार होती रही है।वर्तमान में बीजेपी और सपा दोनों में लोधी समाज से आने वाले नेता सक्रिय हैं। सत्ता पक्ष में धर्मपाल सिंह और कैलाश राजपूत जैसे नेताओं का उल्लेख होता है, जबकि विपक्ष में भी लोधी समाज से जुड़े नेता अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहे हैं।यही वजह है कि दोनों प्रमुख दल इस समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजेपी की संगठनात्मक पकड़ बनाम सपा की PDA रणनीति
बीजेपी की ताकत लोधी प्रभाव वाले कई इलाकों में उसके संगठन और लंबे समय से बने राजनीतिक नेटवर्क को माना जाता है। वहीं समाजवादी पार्टी पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पहुंच लगातार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।अखिलेश यादव की राजनीति में PDA समीकरण को प्रमुख स्थान मिला है। ऐसे में लोधी समाज को इस सामाजिक गठजोड़ का हिस्सा बनाना सपा के लिए चुनावी लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।दूसरी ओर बीजेपी के लिए भी लोधी समाज के बीच अपनी पकड़ बनाए रखना आगामी विधानसभा चुनाव में अहम माना जा रहा है।
एक ही प्रतिमा पर BJP और SP का शक्ति प्रदर्शन क्या संकेत देता है?
रानी अवंती बाई लोधी की जयंती पर एक ही प्रतिमा के सामने बीजेपी और समाजवादी पार्टी के नेताओं की मौजूदगी ने साफ कर दिया है कि 2027 से पहले लोधी समाज को लेकर सियासी मुकाबला तेज होने वाला है।दोनों दल वीरांगना अवंती बाई की विरासत, उनके संघर्ष और लोधी समाज के सम्मान को अपने-अपने राजनीतिक संदेश से जोड़ रहे हैं।अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि लोधी समाज किस पार्टी के साथ जाएगा, बल्कि यह भी है कि 2027 में स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय मुद्दे और व्यापक सामाजिक समीकरण इस वोट बैंक की दिशा को कितना प्रभावित करेंगे।
2027 का बड़ा सवाल
क्या लोधी समाज बीजेपी के साथ अपनी पुरानी राजनीतिक पकड़ बनाए रखेगा या अखिलेश यादव की PDA रणनीति के साथ नया सियासी समीकरण तैयार करेगा?अवंती बाई लोधी की जयंती पर लखनऊ में दिखी बीजेपी और सपा की सक्रियता ने इतना जरूर संकेत दे दिया है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में लोधी वोट बैंक राजनीतिक दलों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहने वाला है।