प्रदेश में सरयू-घाघरा समेत कई नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए योगी सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। शासन स्तर से राहत अभियानों की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि प्रभावित परिवारों तक भोजन, पानी, दवाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं समय से पहुंच सकें।
इसी क्रम में राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फर्रूखाबाद, बलिया और बहराइच के बाढ़ राहत शिविरों का लाइव निरीक्षण किया। उन्होंने शिविरों में मौजूद अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के साथ ही बाढ़ प्रभावित लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं। फर्रूखाबाद के रहमानिया इंटर कॉलेज स्थित राहत शिविर में राहत आयुक्त ने बाढ़ प्रभावित अब्दुल गफ्फार खान से बातचीत की। उन्होंने बताया कि वह छह सदस्यों के परिवार के साथ एक अगस्त से शिविर में रह रहे हैं और उन्हें भोजन, पेयजल, साफ-सफाई तथा दवाओं समेत जरूरी सुविधाएं नियमित रूप से मिल रही हैं।
बहराइच के मिहपुरवा स्थित कम्पोजिट विद्यालय आनंद नगर बरखड़िया राहत शिविर में भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। यहां प्रभावित शिवकुमार निषाद ने बताया कि शिविर में चारपाई, गद्दा, नाश्ता और भोजन की पर्याप्त व्यवस्था है। जलस्तर कम होने के बाद कुछ प्रभावित परिवार अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं, जिन्हें प्रशासन की ओर से राशन किट और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
बलिया के बैरिया क्षेत्र स्थित गोपल नगर टांडी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के राहत शिविर की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। यहां प्रभावित पप्पू यादव ने बताया कि शिविर में तीनों समय भोजन, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई और दवाओं की व्यवस्था है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।
राहत आयुक्त ने तीनों जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए अतिरिक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अयोध्या में सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बावजूद प्रशासन की सक्रियता से राहत एवं निगरानी कार्य लगातार जारी है। जिले के 11 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित परिवारों को अब तक 2,370 राहत किट और 1,450 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं, जबकि पशुओं के लिए 350 कुंतल भूसे की व्यवस्था की गई है। जिले में 14 बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं, जिनमें सहारा बाग शरणालय में 100 प्रभावित लोग रह रहे हैं। वहीं 10 बाढ़ चौकियों से 18 नावों के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की 37 टीमें प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इन टीमों ने 1,224 ओआरएस पैकेट और 2,912 क्लोरीन टैबलेट वितरित की हैं। पशु चिकित्सा विभाग की 21 टीमें टीकाकरण शिविर भी चला रही हैं। अयोध्या में नदी का जलस्तर 93.040 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 92.730 मीटर से 0.310 मीटर ऊपर है।
आजमगढ़ में घाघरा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। उल्टहवा गेज पर जलस्तर 76.30 मीटर दर्ज किया गया है, जो 76.60 मीटर के खतरे के निशान के करीब है। इस्माइलपुर, बदरहुआ और डिघिया गेजों पर भी जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है और प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि टोंस नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर बना हुआ है। प्रदेश में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए शासन और जिला प्रशासन के अधिकारी लगातार राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। सरकार का जोर है कि किसी भी प्रभावित परिवार को भोजन, पानी, चिकित्सा और सुरक्षित आश्रय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत पहुंचाई जा सके।