नेपाल में 26 जुलाई को सुनसरी जिले के देवांगंज इलाके से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद देश में तनाव का माहौल बना, हिंदू और मुस्लिम समूहों के बीच हुई झड़पों के बाद हिंसा सिरहा समेत अन्य इलाकों तक पहुंची, इस दौरान कम से कम तीन लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए, प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया।
हिंसा के बीच नेपाल में देश को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर भी चर्चा तेज होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, नेपाल सरकार ने देश को फिर से आधिकारिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करने का कोई फैसला घोषित नहीं किया है, इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं है, जिनमें कहा जा रहा है कि नेपाल जल्द हिंदू राष्ट्र बनने जा रहा है।
26 जुलाई को कैसे भड़की हिंसा?
रिपोर्टों के मुताबिक, सुनसरी के देवांगंज में एक हिंदू धार्मिक आयोजन के दौरान तेज संगीत और धार्मिक झंडों को लेकर विवाद हुआ, इसके बाद हिंदू और मुस्लिम समूहों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में भी लोग हताहत हुए। बाद में तनाव सिरहा और मधेश के दूसरे हिस्सों तक फैल गया, नेपाल सरकार ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राष्ट्र के नाम संबोधन में हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का भरोसा दिया, उन्होंने लोगों से अफवाह, गलत सूचना और नफरत फैलाने वाली सामग्री से बचने की अपील भी की।
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क्या नेपाल फिर हिंदू राष्ट्र बनेगा?
नेपाल वर्ष 2008 में गणतांत्रिक व्यवस्था अपनाने के बाद धर्मनिरपेक्ष राज्य बना। हालिया हिंसा के बाद हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन वर्तमान में ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है कि नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित किया जा रहा है, इसलिए “किसी भी वक्त नेपाल हिंदू राष्ट्र घोषित हो जाएगा” जैसे दावों को अभी संभावित राजनीतिक मांग या अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बालेन्द्र शाह सरकार के सामने चुनौती
हिंसा के बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की सरकार पर कानून-व्यवस्था और संकट प्रबंधन को लेकर सवाल भी उठे हैं, सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने के साथ राजनीतिक और सामुदायिक नेताओं के साथ संवाद शुरू किया, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करने, हिंसा के जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव को दोबारा बढ़ने से रोकने की है।
हिंदू राष्ट्र की मांग पर आगे क्या?
नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग नई नहीं है और समय-समय पर यह राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। लेकिन मौजूदा हिंसा को देखते हुए किसी भी समुदाय के खिलाफ सामूहिक आरोप लगाने के बजाय सरकार और राजनीतिक दलों के सामने प्राथमिकता शांति और कानून-व्यवस्था बहाल करना है, फिलहाल यह स्पष्ट है कि नेपाल में हालिया सांप्रदायिक हिंसा ने हिंदू राष्ट्र की मांग को फिर से राजनीतिक चर्चा में ला दिया है, लेकिन नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने का कोई आधिकारिक सरकारी फैसला अभी सामने नहीं आया है, आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हिंसा की जांच क्या निष्कर्ष देती है और हिंदू राष्ट्र की मांग नेपाल की राजनीति में कितना प्रभाव पैदा करती है।